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अशरफ बने रसखान, कराई भागवत कथा

Thu, 20 Apr 2017 07:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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भागवत कथा कराने वाले अशरफ अली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 प्यार का कटोरे में गंगा का पानी...हम भी पीयें तुम भी पीयो रब की मेहरबानी...महशूर शायर मंजर भोपाली के इसी शेर को इन दिनों बरनाहल के शख्स अशरफ अली ने चरितार्थ किया है। उसने जन सहयोग से कस्बे में भागवत कथा शुरू कराई है, जो क्षेत्र में चर्चा का ही विषय नहीं है। बल्कि समाज के इस बिगड़े हुए दौर में सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिशाल भी है।
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बता दें कि एक तरफ जहां देश के पढ़े लिखे हाईप्रोफाइल लोग सोशल साइटों पर अपने कमेंट्स से समाज में वैमनस्यता बढ़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मैनपुरी के बरनाहल कस्बे में एक मुस्लिम व्यक्ति सामाजिक सद्भाव की ऐसी मिशाल पेश की, जो यहां की गंगा-यमुनी तहजीब को चरितार्थ कर रही है। कस्बे के मोहल्ला टकरा निवासी असरफ अली ने मजहब की बंदिशों को दरकिनार कर हिंदू-मुस्लिम एकता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। उसने मोहल्ले में शीतला माता मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन कराया है। बताया कि उसके इस आयोजन पर कुछ लोगों ने काफी विरोध भी किया। पर, वह अपनी धुन में लगा रहा। अब तो मुसलिम-हिन्दू दोनों समाज के लोगों का खूब सहयोग मिल रहा है। अशरफ के मुताबिक यह भागवत कथा उसने अपने गुरू सुखदेव दास महाराज उरई की प्रेरणा से सार्वजनिक सहयोग से करवाई है। गुरू ने उसे गरीब दास नाम भी दिया है। असरफ अली नोएडा में सब्जी का ठेला लगाता है। पत्नी रूबीना बेगम की नोएडा में 2011 में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो चुकी है। तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी हिना अपनी दादी के पास रहती हैं और आमीन और आसीन मौसा के पास रहते है। फिलहाल इस भागवत कथा सुनने को रोजाना दोनों समुदाय के लोग बड़ी संख्या में जुटते हैं। कथा सुनने जुटने वालों के जुबान पर अशरफ और उसके सामाजिक सद्भाव के प्रयास ही रहते हैं। 
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