मैनपुरी में करीब 25 साल के इंतजार के बाद किशनी क्षेत्र के किसानों को अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे की आस बंधी है। किसानों को समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा इसी चालू वित्तीय वर्ष में मिल सकता है। प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट में मुआवजे के लिए 25 करोड़ रुपये दिए थे और अब 25 करोड़ रुपये की और मंजूरी दे दी हे। समान पक्षी विहार के लिए किशनी क्षेत्र के सौ से अधिक किसानों की 283 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई थी।
समान पक्षी विहार के लिए क्षेत्रीय किसानों की अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा दिलाने की पहल शुरू होना किसानों के लिए राहत की बात हो सकती है। वर्ष 2011 में वन विभाग ने अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा दिलाने का प्रस्ताव मंडलायुक्त को भेजा था और तत्कालीन मंडलायुक्त सुधीर एम बोबड़े ने भी प्रस्ताव पर सहमति जता दी थी। वन विभाग ने किसानों की जमीन का मुआवजा निर्धारित करने के लिए भू अध्यापति अधिकारी को पत्र लिखा था और प्रस्ताव की प्रति शासन को भेज दी थी। तब से मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी थी। मुआवजे की मांग को लेकर किसान आंदोलन और प्रदर्शन करते रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा देने की पहल शुरू कर दी है। पहले अनुपूरक बजट में सरकार ने मुआवजे के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। यह धनराशि काफी कम होने की जानकारी दिए जाने के बाद सरकार ने 25 करोड़ रुपये की और मंजूरी दे दी है। अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे के लिए अब 50 करोड़ रुपये मिलने से उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
बताते चलें कि वर्ष 1990 में समान पक्षी विहार के लिए सौ से अधिक किसानों की करीब 283 हेक्टेयर कृषि भूमि अधिग्रहीत की गई थी। भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को मुआवजा दिए जाने की घोषणा तो की गई लेकिन आज तक मुआवजा नहीं दिया गया। क्षेत्रीय किसानों ने कई बार आंदोलन, प्रदर्शन और ज्ञापन देकर मुआवजा दिलाने की मांग की लेकिन शासन की ओर से मुआवजा दिलाने के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की गई थी।