मैनपुरी। परिवार पालने की उम्र के आखिरी पड़ाव पर एक वृद्धा न्याय पाने के लिए कोर्ट के चक्कर लगा रही है। शादी के 47 साल बाद उसने परिवार न्यायालय में मुकदमा दायर कर पूर्व सैनिक पति से भरण पोषण के लिए गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की है। अगली सुनवाई के लिए न्यायालय में 23 जुलाई की तारीख तय की गई है।
थाना बिछवां क्षेत्र के गांव जसरऊ के रहने वाले रामसेवक सेना में नौकरी करते थे। उनकी शादी 12 जून 1979 को कुसुमलता के साथ हुई थी। शादी के बाद सब कुछ सामान्य रहा। तीन साल पहले पति-पत्नी के रिश्तों में खटास आने लगी। रामसेवक ने पत्नी को खाना-खर्चा देना बंद कर दिया। 68 साल की उम्र में पत्नी ने पति से खाना-खर्चा पाने के लिए पंचायत कराई। पंचायत का कोई नतीजा नहीं निकला। पति ने कुसुमलता को 26 दिसंबर 2021 को घर से निकाल दिया।
रामसेवक ने जब सामाजिक पंचायत नहीं मानी तो कुसुमलता ने परिवार न्यायालय में गुजारा भत्ता पाने के लिए 20 जुलाई 2022 को मुकदमा दायर किया। बताया कि पति को हर महीने पेंशन मिलती है। उनके नाम 20 बीघा खेत भी है। पति के खाना-खर्चा देना बंद करने से उसको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
न्यायालय से भेजे गए नोटिस के बाद रामसेवक न्यायालय में हाजिर हुआ। उसने न्यायालय में अपना जवाब भी जमा किया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय देवराज प्रसाद सिंह ने अगली सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय कर दी है।
पांच बच्चे, चार की हो चुकी है शादी
कुसुमलता ने न्यायालय में बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। तीन पुत्र अमित, सुमित, संतोष, दो पुत्री विनीता और ज्योति है। अमित, सुमित, संतोष, विनीता की शादी हो चुकी है। ज्योति की शादी अभी नहीं हुई है। वह अपनी मां के साथ ही रहती है। उसका खर्चा मां ही वहन कर रही है। शादीशुदा चार बच्चे अपने परिवार के साथ ही रहते हैं।