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अशिक्षा के अंधेरे में नन्हे दीये का जगमग हौसला

Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
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मैनपुरी। गरीबी का अंधेरा गहरा होता है। इसमें अशिक्षा और घुल जाए तो जिंदगी भर निजात की राह नहीं मिलती। यह बात शामीन खूब समझती हैं। उन्होंने पाया कि अल्पसंख्यक समुदाय, जिससे वह खुद आती हैं, में अशिक्षा अंधेरा ज्यादा ही गहरा है तो इसमें गर्त हो रहे बचपन को बचाने की ठानी। कोशिश में छोटा सा दीया जलाया। आज उसी की रोशनी में तमाम बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं।
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एक निजी स्कूल में टीचर महमूद नगर निवासी शामीन का शिक्षायज्ञ तीन साल पहले शुरू हुआ। परिवार से मश्विरे के बाद मोहल्ले के उन गरीब परिवारों से संपर्क किया जिनके बच्चे अनपढ़ थे। उनसे कहा कि अपने बच्चे उनके घर भेजें, वह खुद उन्हें दुनियावी तालीम देंगी। तब ‘अंधेरा’ इतना घना था कि किसी ने कान न दिया। बार-बार जोर दिया तो जवाब मिला, रोटी तो मुश्किल से जुटती है कापी-किताब कहां से लाएं। जब शामीन ने आश्वस्त किया कि कोई फीस नहीं उल्टे वे न कर पाए तो किताब-स्टेशनरी खुद दिला देंगी। इतने के बाद भी सिर्फ पांच बच्चे पढ़ने आए। पीढ़ियों पुराने ‘अंधेरा’ की जड़ परंपरा पर यह पहली चोट थी। आरंभिक पढ़ाई के बाद शाहीन के प्रयासों से हाजी जैनुद्दीन और आसिफ अली जैसे कुछ अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को राजी हुए। ‘अंधेरा’ थोड़ा और छंटा। आज तीन साल बाद हाल यह है कि चार से दस साल तक के करीब चार दर्जन बच्चे स्कूलों में क्लास दर क्लास लांघ रहे हैं। अब भी 15-16 बच्चे रोज पढ़ने आते हैं। अधिकांश स्कूल जाते हैं। शामीन के रोज के तीन घंटे इन्हें समर्पित हैं। उनकी सराहना करते हुए खानकाहे रशीदिया के बबलू मियां कहते हैं, काश कुछ और युवा आगे आएं तो कौम की अगली पीढ़ी शिक्षित होगी।
‘अंधेरा’ अब भी कम नहीं। शामीन का हौसला लेकिन जगमग है। उन्हें उम्मीद है, प्रयास रंग लाएगा। एक दिन मोहल्ले का हर बच्चा स्कूल की सीढ़ियां चढ़ आकाश छूने के सपने देखेगा। आमीन!
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परिचय
पिता मोहम्मद मुन्ना सिद्दीकी ट्रांसपोर्टर हैं। घर में आठ भाई बहन। बहनों में शामीन दूसरे नंबर की है। प्राथमिक शिक्षा प्राइमरी स्कूल में। माध्यमिक शिक्षा यूपी बोर्ड से। एमए (अंग्रेजी), एमएड और उर्दू से बीटीसी। दीनी तालीम भी हासिल की है। कहती हैं, न सरकारी इमदाद पाने की चाह है न ही किसी पुरस्कार की दरकार है। समाज के बच्चे काबिल बनें, यही कोशिश है।
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