मैनपुरी। नाबालिगों के हित संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत गांव स्तर पर जल्द ही बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर समिति का गठन किया जा चुका है। इस समिति को नाबालिगों का उत्पीड़न रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गांव और ब्लाक स्तरीय समिति के संज्ञान में आने वाले प्रकरण जिला स्तर पर गठित जिला स्तरीय समिति को सौंपे जाएंगे। यह समिति तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई अमल में लाएगी।
योजना के तहत जिला मुख्यालय पर जिला बाल संरक्षण समिति का गठन किया गया है। प्रदेश के महिला और बाल विकास विभाग ने भी ब्लाक और गांव स्तरीय समिति गठित करने पर जोर दिया है। विभाग का मानना है कि जमीनी स्तर पर ऐसी समितियां गठित होने से नाबालिगों का उत्पीड़न रोका जा सकेगा। जिला स्तर पर गठित समिति के अध्यक्ष जिला जज और सचिव जिला प्रोवेशन अधिकारी होंगे। गांव स्तर पर बीडीओ, ग्राम प्रधान को समिति की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जिला प्रोवेशन अधिकारी रामनरेश वर्मा ने बताया कि शीघ्र ही इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। चालू वर्ष में ही गांव स्तर पर समितियां गठित कर उनकी बैठक बुलाई जाएगी।
अभिभावक और रिश्तेदारों पर भी नजर
नाबालिगों के उत्पीड़न के बहुत से मामलों में उनके नजदीकी भी निकलते हैं। इस योजना के तहत गठित की गई समितियां इस ओर भी नजर रखेंगी। अभिभावक या किसी रिश्तेदार के खिलाफ शिकायत की समिति द्वारा सुनवाई की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर अभिभावकों को छह माह की सजा भुगतनी होगी। वहीं जीजा-साली के बीच मजाक की आड़ में नाबालिग साली का उत्पीड़न किए जाने की शिकायतें भी मिलती हैं। नाबालिग द्वारा शिकायत की जाती है कि उसके साथ छेड़छाड़ की गई है या उसे अपमानित करने के इरादे से कृत्य किया गया है, तो सुनवाई के दौरान शिकायत साबित होने पर जीजा को तीन से 10 साल तक की सजा सुनाई जाएगी। साथ ही आरोपी जीजा के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया जाएगा।