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तिकड़म से खरीद ली पट्टे की जमीन

Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
Mainpuri
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मैनपुरी। भोगांव तहसील के गांव सुल्तानगंज में दलितों को किए गए पट्टे की जमीन को तिकड़म कर खरीदने का मामला प्रकाश में आया है। क्षेत्र के दबंगों ने करीब 70-80 बीघा जमीन दलितों की जाति बदलकर बैनामा भी करा लिया है। करोड़ों की खेतिहर जमीन पर राजस्व की भी चोरी की गई है। गौर करने वाली बात यह है कि इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार ने अपने आदेश में जमीन को पट्टे की नहीं माना है। जबकि मौजूदा जिलाधिकारी ने इस भूमि को पट्टे की स्वीकार किया है।
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सुल्तानगंज में यह गड़बड़ झाला रसूखदार लोगों ने किया है। इन लोगों ने अनुसूचित जाति के ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाया, जो आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े लिखे हैं। धोबी और खटीक जाति के छह लोगों की जमीन इन्होंने उनकी जाति बदलकर अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम करा ली। नियम है कि अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन खरीदने से पहले धारा 157/एए के तहत अपर जिलाधिकारी राजस्व से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इस मामले में न तो जमीन को पट्टे की दर्शाया गया और न ही विक्रेताओं को अनुसूचित जाति का, जबकि जमीन विक्रय करने वाले सभी छह लोग दलित वर्ग से हैं।
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तत्कालीन तहसीलदार ने केस किया पेचीदा
दो वर्ष पहले जब ये मामला भोगांव तहसील के तत्कालीन तहसीलदार के सामने लाया गया था तब उन्होंने सात जुलाई 2010 को दिए गए अपने निर्णय में कहा था कि लेखपाल की रिपोर्ट के अनुसार भूमि सीलिंग, भूदान तथा ग्राम समाज के पट्टे की नहीं है। वहीं, 25 जनवरी 2012 को संबंधित लेखपाल ने तहसीलदार के यहां जो आख्या दी, उसमें पट्टे से प्राप्त दर्शाया गया है। दोनों रिपोर्ट केस को पेचीदा बना रहे हैं।
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डीएम ने माना भूमि पट्टे की है
भोगांव के गांव चिर्रा निवासी ब्रजेश कुमार ने उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और सचिव से शिकायत की। आयोग ने डीएम से स्पष्टीकरण तलब किया। मौजूदा डीएम विजय विश्वास पंत ने इस मामले में जो रिपोर्ट भेजी उसके अनुसार, सभी विक्रेता अनुसूचित जाति के हैं। क्रेता यादव जाति के हैं। विक्रीत भूमि पट्टे से प्राप्त है, जो जोत बंदी आकार पत्र सीएच-45 में संक्रमित भूमि में दर्ज है। इस पर क्रेताआें का ही कब्जा है। संबंधित भूमि का वाद भी न्यायालय अपर आयुक्त, आगरा मंडल, आगरा में चल रहा है। डीएम का कहना है कि चूंकि वाद चल रहा है, इसलिए फौरी तौर पर कार्रवाई की नहीं जा सकती।
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