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Mainpuri News: 53 साल बाद मिली 60 बीघा जमीन

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मैनपुरी। 120 बीघा जमीन की आधी हिस्सेदारी पाने के लिए एक परिवार की तीन पीढ़ियों ने 53 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष में दो पीढ़ियां दुनिया से विदा हो गईं और तीसरी पीढ़ी भी बुढ़ापे की दहलीज पर पहुंच गई। अब जाकर चकबंदी न्यायालय ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें उनका हक सौंपा है।
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मामला भोगांव तहसील क्षेत्र के मौजा राजपुर कलां का है। यहां की 120 बीघा विवादित भूमि में से आधे की हिस्सेदार बेटी कुमारी थीं। आरोप है कि उनके जीवित रहते विपक्षियों ने राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से 24 फरवरी 1973 को उन्हें मृत दर्शाकर जमीन अपने नाम करवा ली थी। धोखाधड़ी का पता चलने पर बेटी कुमारी ने मुकदमा कर दिया। कानूनी लड़ाई के दौरान बेटी कुमारी ने अपनी इकलौती बेटी विटोला देवी के हक में 17 अक्तूबर 1979 को पंजीकृत वसीयत कर दी। 24 मई 1984 को बेटी कुमारी का निधन हो गया जिसके बाद विटोला देवी ने पैरवी जारी रखी।
मामला तहसीलदार, एसडीएम, मंडलायुक्त (आगरा) और राजस्व परिषद (लखनऊ) तक पहुंचा। चकबंदी प्रक्रिया शुरू होने के बाद मामला चकबंदी न्यायालय के समक्ष आ गया। 24 जून 2010 को विटोला देवी की भी मौत हो गई। मृत्यु से पहले उन्होंने अपने पुत्र राजकुमार के नाम 18 जून 2010 को वसीयत कर दी थी।
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पुत्र राजकुमार सिंह, विजय कुमार सिंह और उनके उत्तराधिकारी मोहित, रोहित व मनीष ने कानूनी ई जारी रखी। आखिरकार 53 साल बाद चकबंदी अधिकारी ने उपलब्ध साक्ष्यों, परिवार रजिस्टर, मृत्यु प्रमाण पत्र और 18 जून 2010 के पंजीकृत वसीयतनामे को सही पाते हुए विपक्षियों की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने राजपुर कलां व नगला मिती के संबंधित खातों में मृत बेटी कुमारी व विटोला देवी के स्थान पर उनके कानूनी वारिस राजकुमार सिंह व अन्य उत्तराधिकारियों का नाम आधे भाग पर बतौर सह-संक्रमणीय भूमिधर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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