महोबा। बुंदेलखंड में फिल्मों के प्रति लगातार युवाओं का क्रेज बढ़ता जा रहा है। इन दिनों युवा थिएटर की बारीकियां समझने के साथ रंगमंच पर खुद को आजमाते नजर आ रहे हैं। युवाओं का थिएटर की ओर बढ़ता आकर्षण उनके हुनर को तराशने में बखूबी मदद कर रहा है। अपना हुनर दिखाने के लिए युवा सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। (संवाद)
गांधीनगर निवासी अंश कश्यप बुंदेलीवुड के संस्थापक हैं। खुद को एक फिल्म टीचर व डायरेक्टर के रूप में देखने की इच्छा ने उन्हें रंगमंच से जोड़ दिया। अपनी जॉब के साथ वह फिल्मी दुनिया में पूरी तरह से खुद को स्थापित करने में जुटे हैं। पांच युवा उनके साथ शॉर्ट फिल्में और विभिन्न एलबम में काम कर चुके हैं। बुंदेली भाषा की फिल्मों व गानों को खूब सराहना मिली है।
रितिक भारद्वाज बताते हैं कि शुरू से ही उनका थिएटर की ओर रुझान रहा है। वह अपना कॅरिअर भी इसी में बनाना चाहते हैं। सोशल मीडिया ने प्रतिभा दिखाने का प्लेटफॉर्म दिया। शॉर्ट फिल्मों और गानों में प्रशंसा मिलने से वह गदगद हैं। आगे भी रंगमंच से जुड़े रहेंगे।
गांधीनगर निवासी एजे रॉक ने बताया कि साल 2010 से उन्होंने मुंबई में चार साल काम किया। कुछ एड फिल्म और एलबम में पर्दे के पीछे का काम किया। अब बुंदेलखंड में शॉर्ट फिल्म में मुख्य किरदार की अदाकारी करने का मौका मिला। उनका सपना अच्छे सीरियल व फिल्म में जाने का है।
अनुज गुप्ता बताते हैं कि एएमबी फिल्म प्रोडक्शन हाउस बुंदेलखंड के युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका दे रहा है। वह शॉर्ट फिल्मों में खुद को आजमा रहे हैं। यूट्यूब पर बुंदेली भाषा में गीत और शॉर्ट फिल्में पसंद की जा रही हैं। फिल्म करने से उन्हें सुकून व आत्मबल मिलता है।
अंश कश्यप के साथ काम करने वाले युवा होली मोरे संगे मना ले, मोरी सनम, तेरे आगोश में, सांवरे वीडियो एलबम के अलावा शॉर्ट फिल्म लैपटॉप, कोरोना, हम हैं समाजसेवक बना चुके हैं। पिछले माह शॉर्ट फिल्म कोरोना के लिए जनपद झांसी में सम्मानित किया जा चुका है। अंश कश्यप को बुंदेलखंड गौरव सम्मान और झांसी में एचीवमेंट सम्मान मिला है।