संगीत के सात सुराें की लड़ियाें को लय, ताल की माला में पिरोकर प्रस्तुत करने वाली भक्ति और शक्ति सोनी प्रदेश स्तर के अलावा इंडियन कंप्टीशन तक अनेक संगीत प्रतियोगिताआें में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं। दोनाें बहनें एक साथ तबले की धुन पर भजन, गजल प्रस्तुत करती हैं। 14 वर्षीय भक्ति और 13 वर्षीय शक्ति सोनी ने संगीत की शिक्षा अपने संगीत टीचर पिता जयनारायण सोनी से घर पर ही ली है। दोनाें बहनें घर पर ही दो-दो घंटे का रियाज करती हैं। तबला, हारमोनियम, वादन के साथ ही वह शास्त्रीय भजन, गजल और लोकगीत गायन में भी निपुण हैं। भक्ति ने वर्ष 2003 में प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संबंधित शास्त्रीय गायन परीक्षा में भाग लेकर सर्वाधिक अंक प्राप्त करके सभी प्रतिभागियाें को चौंका दिया था। वर्ष 2005 में झांसी के लक्ष्मीबाई व्यायाम मंदिर में प्रभु श्यामलाल संगीत विद्यालय के तत्वावधान में आयोजित संगीत प्रतियोगिता में भी पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद प्रदेश स्तरीय संगीत प्रतियोगिता की हकदार बनीं। 9 अप्रैल 2007 में आकाशवाणी छतरपुर की स्वर परीक्षा में भक्ति और शक्ति ने शास्त्रीय संगीत गायन परीक्षा पास कर ली। अब आकाशवाणी कलाकार के रूप में कार्यक्रम देती हैं। बुंदेलखंड संगीत प्रतियोगिता झांसी में वर्ष 2012-13 में शास्त्रीय और सुगम संगीत में विनर बनने के बाद संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में आयोजित प्रदेश स्तरीय गायन प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं अक्टूबर 2014 में प्रभु रामलाल संगीत महाविद्यालय झांसी के तत्वावधान में झांसी में आयोजित बुंदेलखंड संगीत प्रतियोगिता में शक्ति और मुक्ति ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं माह जनवरी में विकास भवन में आयोजित लोकगीत प्रतियोगिता में सामूहित लोकगीत में शक्ति और भक्ति ने प्रथम स्थान हासिल किया।
जिले में बालिकाओं की जन्म दर
वर्ष शहरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र
2010 23.9 29.0
2011 23.7 28.8
2012 23.5 28.4
जिले में बालिकाओं की मृत्यु दर
वर्ष शहरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र
2010 6.3 8.7
2011 6.1 8.3
2012 6.0 8.1
जिले में लिंगानुपात की स्थिति
जनगणना वर्ष 2014 के अनुसार 889/1000
सरकारी विद्यालय से महरूम आधी आबादी
आठ लाख की आबादी वाले जिले में एक भी राजकीय महिला विद्यालय न होने से जिले की बेटियां उच्च शिक्षा से महरूम है। जहां सिर्फ एक प्राइवेट कॉलेज के भरोसे ही जिले की उच्च शिक्षा चल रही है। वहीं जिले में महाविद्यालय की कमी के चलते हर साल तमाम छात्राएं घर बैठने को मजबूर हैं। इसे बालिकाओं का दुर्भाग्य कहें या जनप्रतिनिधियों की अकर्मण्यता कि यहां उच्च शिक्षा के नाम पर केवल एक प्राइवेट महिला महाविद्यालय है। इससे हर साल जुलाई में स्नातक की कक्षाओं में एडमिशन को मारामारी होने से हजारों छात्राएं घर बैठने को मजबूर हो जाती हैं।