महोबा। दूसरा लॉकडाउन हो जाने के बाद महानगरों से अब श्रमिकों ने अपने घरों के लिए आना शुरू कर दिया है। महानगरों से पैदल और ट्रकों के सहारे महोबा आए श्रमिक थक जाने के कारण कुलपहाड़ अंडरब्रिज के पास थकान मिटाने लगे।
25 मार्च से पूरा देश लॉकडाउन हो जाने के कारण जो जहां था वहीं फंस गया। तमाम श्रमिक पैदल चलकर घर आ गए, जबकि सैकड़ों लोग 15 अप्रैल तक लॉकडाउन खुलने की उम्मीद में जहां थे वहीं रुक गए, लेकिन 14 अप्रैल को ही पुन: लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। इससे महानगरों में रह रहे श्रमिक बेचैन हो गए। राजस्थान के बारा जिले से 14 अप्रैल को लॉकडाउन होने की घोषणा होते ही 16 लोगों का जत्था पैदल निकल पड़ा। राजेश कुमार, सुंदर, कामता, हरिराम, मन्नू बताते है कि 150 किमी पैदल चलने के बाद एक ट्रक चालक का दिल पसीज गया और उसने ग्वालियर तक सहारा दिया।
ग्वालियर से 50 किमी पैदल चलने के बाद पुन: ट्रक में बैठ गए। इससे झांसी तक आ गए। झांसी से 130 किमी पैदल चलकर कुलपहाड़ तक आए। पैरों में छाले पड़ जाने के कारण पैर जवाब दे गए। इससे श्रमिक मजबूरन अंडरब्रिज के पास आराम करने लगे। उनका कहना है कि बांदा से 50 किमी आगे पुरैनियां गांव जाना है, लेकिन अब पैरों के काम न करने से वह अगले दिन ही निकलेंगे। उनका कहना है कि रास्ते में एक स्थान पर भोजन मिला है। तीन दिन भूखे सफर किया है।