जिले में किसानाें की आत्महत्या और सदमे से हो रही मौताें
का सिलसिला थम नहीं रहा है। शनिवार को दो अलग-अगल स्थानों में एक महिला
किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली तो वहीं दूसरी घटना में किसान की
सदमे से मौत हो गई। मौेके पर पहुंची पुलिस ने शव को पंचनामा कर पोस्टमार्टम
के लिए भेज दिया है।
ग्राम बागौल निवासी कंधीलाल अहिरवार (65) पुत्र हिरवा अहिरवार ने गांव में अपनी तीन एकड़ भूमि में चना और गेहूं की फसल की बुवाई की थी। लेकिन इस दफा हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसल पूरी तरह तबाह हो गई। मड़ाई के बाद निकली बेहद कम पैदावार घर आने के बाद से किसान खासा परेशान रहने लगा था। किसान ने खेत में बुवाई के लिए भारतीय स्टेट बैंक से एक लाख रुपये, साधन सहकारी समिति से 15 हजार, किसान सेवा समिति से 50 हजार रुपये और साहूकाराें से 50 हजार रुपये कर्ज लिया था। बर्बाद फसल और कर्ज अदायगी को लेकर परेशान किसान के सीने में अचानक दर्द उठने पर उसकी चीख सुनकर परिजन दौड़ पड़े और आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुलपहाड़ पहुंचाया। जहां चिकित्सकाें ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं दूासरी घटना ग्राम बरबई निवासी चंदा (50) पत्नी सत्यदेव ने गांव ग्राम बरबई स्थित 40 बीघा एवं जरिया में छह हेक्टेयर भूमि में रबी की फसल की बुवाई की थी। इस बार महिला किसान को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। यही नहीं उसने अच्छी पैदावार होने पर बेटी की शादी के अरमान संजो रखे थे। लेकिन ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से सारी फसल बर्बाद हो गई। महिला किसान बेटी की शादी और ट्रैक्टर के लोन की अदायगी को लेकर खासी परेशान थी। शनिवार को चंदा ने घर पर सुनसान पाकर शरीर पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। कमरे से धुआं निकलता देख परिजन दौड़ पड़े और आनन-फानन में आग बुझाकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां चिकित्सकाें ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उधर उप जिलाधिकारी सदर प्रबुद्ध सिंह का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। पता लगवाया जा रहा है।