तीन दशक पहले पालिका प्रशासन ने सब्जी मंडी परिसर में लाखों रुपये लगाकर तीन दर्जन दुकानें बनाई थीं। जिससे कि दुकानदार दुकानों में बैठकर सब्जी बेंचे। इसके लिए प्रति दुकान 700-1,000 रुपये किराया निर्धारित किया गया था। किराया कम होने के बाद भी लोगों ने इन्हें किराए पर नहीं लिया। नगर पालिका के अधिकारियाें की उदासीनता के चलते दुकानें धूल खा रही हैं। एक माह पहले चले अतिक्रमण हटाओ अभियान दौरान सब्जी विक्रेताओं की दुकानों को सड़क से हटाकर पक्की दुकानाें में शिफ्ट नहीं कराया गया। जिससे राजस्व की खासी क्षति हो रही है। वहीं इन दुकानों का उपयोग लोग जानवराें को बांधने में कर रहे हैं। लाखाें रुपये की लागत से बनाई गई दुकानाें की अभी तक लागत तक नहीं निकल सकी है।
सड़क पर दुकानें लगाने से लगता जाम
नगर पालिका द्वारा सब्जी मंडी में पक्की दुकानें बनवाए जाने के बाद भी सब्जी विक्रेता फुटपाथ पर सब्जी लगाकर अपना काम चला रहे हैं। जिससे सब्जी मंडी मार्ग से निकलने में लोगाें को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। सड़क के दोनाें तरफ सब्जी विक्रेताआें द्वारा फुटपाथ पर सब्जी लगाने से मार्ग संकरा हो गया है। इससे राहगीराें व अन्य लोगाें को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
नगर पालिका द्वारा सब्जी मंडी में बनाई गई दुकानाें में कब्जे की जानकारी नहीं है। अगर लोगों ने कब्जा कर रखा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- पुष्पा अनुरागी, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद महोबा।