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एक माह से बसौठ गांव की पेयजल आपूर्ति ठप, मची मारामारी

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खरेला (महोबा)। विकास खंड चरखारी के बसौठ गांव में बूंद-बूंद पानी को लेकर मारामारी मची है। गांव के बाहर स्थापित टंकी को भरने के लिए लगे दोनों मोटर एक माह पहले फुंक गए थे। पूरे गांव की पेयजल आपूर्ति एक माह से ठप है। अधिकांश हैंडपंपों के जवाब देने से ग्रामीण निजी खर्च पर टैंकरों से पानी मंगाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश है।
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तीन हजार की आबादी वाले बसौठ गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए पंप हाउस व टंकी स्थापित है। पंप हाउस में लगे दोनों मोटर एक माह से खराब पड़े हैं। गांव में 24 हैंडपंपों में से 21 जवाब दे गए हैं। गांव के बाहर लगे तीन हैंडपंपों में पूरे दिन पानी भरने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती हैं। लोगों ने अब निजी खर्च पर टैंकर से पानी मंगाना शुरू कर दिया है।
ग्रामीण महेंद्र तिवारी, बृजनंदन, निखिल कुमार, आशीष कुमार वर्मा आदि का कहना है कि गांव में पानी की विकराल समस्या है। न तो जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। इस कारण लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है। ग्रामीणों ने डीएम सत्येंद्र कुमार को शिकायती पत्र भेजकर पेयजल समस्या दुरुस्त कराने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन में मोटर दुरुस्त कराकर आपूर्ति बहाल न कराई गई तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे। उधर, खंड विकास अधिकारी चरखारी प्रशांत कुमार का कहना है कि पानी की समस्या की जानकारी नहीं है। समस्या के निराकरण के लिए सचिव को गांव भेज कर पेयजल आपूर्ति बहाल कराई जाएगी।
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सुगिरा में 70 फीसदी हैंडपंप खराब
कुलपहाड़। ग्राम पंचायतों में प्रधान न होने का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत सचिव के गांव न आने से हैंडपंप दुरुस्त नहीं कराए जा रहे हैं। इस कारण पेयजल की किल्लत है। जैतपुर ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत सुगिरा में सौ से अधिक हैंडपंप हैं जिसमें 70 खराब पड़े हैं। बस स्टैंड के समीप लगे चार हैंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया है। इस कारण यात्रियों को दिक्कत हो रही है। ग्रामीण अनिल कुमार, सुनील, कालीचरन, नंदकिशोर आदि का कहना है कि सचिव का निवास मध्यप्रदेश में हैं। वह महीनों से गांव नहीं आ रहे है। जिसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। (संवाद)
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