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बंजर भूमि पर अनार से आनंद

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खन्ना (महोबा)। क्षेत्र के ग्योड़ी गांव के किसान प्रमोद सिंह लोगों के लिए मिसाल हैं। वह बुंदेलखंड के पहले किसान हैं, जिन्होंने पांच एकड़ बंजर जमीन पर मेहनत कर उपजाऊ बनाया और अनार की बागवानी कर कामयाबी की इबारत लिखी। उनके अनार की उपज को व्यापारी खासी तरजीह दे रहे हैं। अब तो प्रमोद सिंह इलाके में अनार की फसल के उत्पादन का गुरु बन गए है। आसपास के किसान उनसे अनार की बागवानी सीखने आते हैं।
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बुंदेलखंड क्षेत्र काफी समय से सूखे की मार झेल रहा है। विपरीत हालात में ग्योड़ी गांव के किसान प्रमोद सिंह मेहनत व परिश्रम से अपनी बंजर पर मुनाफे की फसल खड़ी कर दी। उन्होंने चार साल पहले ऊसर भूमि पर अनार का बगीचा लगाया था। सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था नहीं थी तो उन्होंने सबमर्सिबल पंप लगवाया । प्रमोद ने बताया कि दो साल बाद अनार के पौधे पेड़ में बदल गए और फल देने लगे। जून 2020 में पेड़ से अनार तुड़वाए और करीब 250 कुंतल लाल दाने के अनार की उपज निकली। जिसे थोक बाजार में 40 से 45 किलोग्राम के हिसाब बेचा। शुरुआती दौर में उन्होंने करीब 11.25 लाख रुपये के अनार बेच लिए। पहली ही फसल में उन्हें खर्चा निकालने के बाद करीब पांच लाख रुपये फायदा हुआ।
प्रमोद सिंह का कहना है कि अभी पेड़ छोटे हैं। ऐसे में भी इन पेड़ों ने मुनाफा देना शुरू कर दिया है। अब अगली फसल की उपज मार्च अथवा अप्रैल 2021 में मिलेगी। उन्होंने करीब 18 बीघा जमीन पर अनार का बगीचा लगाया है।
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पूना से लेकर आए थे पौध
उन्नत किस्म के अनार की पौध के लिए प्रमोद सिंह ने काफी लोगों से संपर्क किया। इस दौरान उसे जानकारी मिली कि पूना में अनार के पौध मिलते हैं, जो जल्द ही फल देने लगते हैं। फिर क्या था प्रमोद सिंह सीधे पूना गए। उन्होंने वहां से अनार की पौध खरीदी। पूना में उन्हें 85 रुपये प्रति पौधा मिला। करीब दो हजार पौधे उन्होंने गांव लाकर अपने खेत में रोपित किए और समय-समय सिंचाई व खाद डालकर पौध तैयार की। अब प्रमोद को अपनी मेहनत का फल मिलने लगा है।
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