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गर्मी में ट्यूबवेलों और हैंडपंपों ने दिया जवाब

Tue, 26 May 2015 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
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महोबा। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ ही जिले में पेयजल का संकट गहरा गया है। शहर के अलावा ग्रामीण अंचलों में भी पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। जिससे लोग पेयजल के लिए हैंडपंपों का सहारा ले रहे तो कुछ कुओं से पानी भरकर प्यास बुझा रहे है। गर्मी की दस्तक के साथ ही तेजी से जल स्तर घट रहा है। ग्रामीण अंचलों में लगे लगभग 10 प्रतिशत हैंडपंप ड्राई हो चके हैं। वहीं तमाम ट्यूबवेलों ने जवाब दे दिया है। जिससे पानी का संकट बढ़ गया है। जिससे पीने के पानी के लिए लोगों को एक-एक किलोमीटर दूर पानी लेने जाना पड़ता है। वहीं गर्मी के बढ़ने के साथ ही नलों और कुओं ने भी जवाब दे दिया है। शहरों के  साथ-साथ ही ग्रामीण अंचलों में भी पानी की किल्ल्त दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। 23 गांव के लिए बनाई गई बेलाताल ग्राम समूह पेयजल योजना महज तीन गांव की पेयजल आपूर्ति कर रहा है, जिससे शेष गांवों में पानी के लिए लोगों को उधर-उधर भटकना पड़ता है कुलपहाड़ में तीन ट्यूबवेलों और बेलासागर से पानी की सप्लाई की जाती है, लेकिन दो दो दिन तक पानी सप्लाई न होन से कस्बे में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। पानी आने पर भी दस से पंद्रह मिनट तक पानी की आपूर्ति नहीं होती है। ग्राम खन्ना और खरेला में ग्रामीण एक एक किलोमीटर दूर से कुओं से पानी ला रहे हैं।
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पानी के लिए रातों को जाग रहे लोग
पानी को लेकर लोगों की रातों की नींद हराम हो गई है। पानी भरने के चक्कर में लोग रातों को सो नहीं पा रहे हैं। कुआें के गिरते जलस्तर के चलते लोग तीन बजे सुबह से ही पानी भरने में लगे जाते है।

बिजली कटौती बनी पेयजल संकट का सबब
चौबीस घंटे में मात्र 12 घंटे बिजली आने से पानी की टंकियां नहीं भर पा रही हैं। जिससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जिले में चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाआें के तहत जिला मुख्यालय में तीन सीडब्ल्यूआर टैंक और एक ओवरहेड टैंक बनाया गया। जबकि एक ओवरहेड टैंक और एक सीडब्ल्यूआर टैंक पहले से ही बना है। इसके अलावा ग्रामीण अंचलाें में एक दर्जन से ज्यादा ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। लेकिन बिजली न आने से इन टैंकाें में नाम मात्र का पानी पहुंच रहा है। जिससे पेयजल संकट दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
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