शनिवार देर रात से शुरू हुई बारिश से किसानों के चेहरे की खुशी उड़ा ले गई । सारी रात और सारा दिन बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। इस वर्ष अच्छी फसल की आस लगाए बैठे किसानों को अरमानों को भारी झटका लगा है।बारिश के चलते छिकहरा, करहरा, रैपुरा, डढ़हत, चांदो, चंद्रपुरा, अलीपुरा, बरीपुरा, दमौरा, पसवारा, रतौली, पलका, सिजहरी, शाहपहाड़ी, किड़ारी सहित तमाम गांवों में खेतों में खड़ी फसल जमीन में बिछ गई। सबसे ज्यादा नुकसान मसूर, मटर, लाही को हुआ है। वहीं गेहूं की फसल जमींदोज हो गई है। फसल की बर्बादी से किसानों को खासा आर्थिक झटका लगा है। किसान मान सिंह, गनपत रैक्वार, छिद्दू, अशोक, इद्दू, लीलाधर आदि किसानों ने बताया बारिश ने इस साल की फसल को बर्बाद कर दिया है। जिससे किसानों के सामने रोजी रोटी के साथ-साथ फसल की बुवाई के बैंक से कर्ज लेने की नौबत आ गई है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। इसके अलावा चरखारी, कबरई, जैतपुर और पनवाड़ी विकासखंड के तमाम गांवाें में भी बारिश से किसानों की फसलें तबाह हो गईं। कुलपहाड़ प्रतिनिधि के मुताबिक, क्षेत्र के लाड़पुर, बम्हौरी खुर्द, सिरमौर, कुलपहाड़, मोहारी, कमालपुरा, सुगिरा, भटेवरा, सेला खालसा सहित तमाम गांवों में बारिश की चपेट में आकर फसलें तबाह हो गई हैं।
जिससें किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। खरेला प्रतिनिधि के अनुसार, खरेला, बसौठ, धवारी, खरेला देहात, पुन्निया, बारी, पड़ोरा, ऐंचाना, पुपवारा, पहरेथा, बरांय, पाठा, कमलखेड़ा क्षेत्र में मसूर और मटर को खासा नुकसान हुआ है। किसान राजेंद्र सिंह, जीतेंद्र तिवारी, सरमन सिंह, रविंद्र सिंह, जय सिंह, पुन्निया के भजनलाल, रमेश सिंह ने बताया चने और लाही का फूल झड़ गया। जबकि दस प्रतिशत मसूर और मटर की उखड़ चुकी है। वहीं गेंहूं की 15 प्रतिशत फसल भी झुक गई है।