बरसाना से आई कथावचिका लाडली जी ने कहा कि एक बार सोमवती अमावस्या पड़ने से कलयुग की आयु दो सौ वर्ष घट जाती है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन का सही ढंग से पालन करते हुए ईश्वर को याद कर लेना ही सबसे बड़ी पूजा है। सहस्र श्री स्वामी गोवद्र्धन्नाथ जी महराज मेला प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बरसाना की कथा वाचिका अमृत कथा की सरपान करा रहीं थी। उन्होंने कहा कि जो फल बड़े बड़े सन्यासियों के तप से मिलता है। वही फल भावपूर्ण होकर गृहस्थी का दैनिक कार्य करते हुए ईश्वर को याद करने से मिल सकता है।
जिसमें आवश्यकता केवल प्रेम की है। ईश्वर ने मनुष्य को बनाया सबको एक समान समझ के सबको सांसे, शरीर, रक्त सभी को एक समान प्रदान किया कही भेद भाव नही किया। उन्होंने भजन तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ और कृष्ण के जन्म की कथा सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने राजा बली की कथा से जुड़े कई रोचक प्रसंग सुनाए। भागवत कथा दौरान कलाकारों ने भगवान श्री कृष्ण के अवतारों की सजीव झांकी प्रस्तुत की।