राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों की तैनाती न होने से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। एक दर्जन से ज्यादा सृजित पदों के सापेक्ष महज तीन सहायक अध्यापकों पर शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी है। प्रवक्ता के नौ पदों में से एक प्रवक्ता की तैनाती है। टीचरों की कमी से जूझ रहे छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता को लेकर अभिभावक खासे चिंतित है।
विकासखंड कबरई के गांव श्रीनगर में स्थित राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों की तैनाती एक वर्ष बाद भी नही हो पाई। सृजित पदों के सापेक्ष चौथाई भी शिक्षकों की तैनाती न होेने से छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। श्रीनगर के साथ-साथ जुड़े आधा दर्जन गांव और सीमावर्ती मध्य प्रदेश के जुड़े कई गांव के 2300 छात्र छात्राएं श्रीनगर के विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे है। पिछले वर्ष शिक्षकों की कमी होने से आगामी सत्र से शिक्षकों की तैनाती का भरोसा दिया गया था। एक वर्ष व्यतीत होने के बाद भी शिक्षकों की तैनाती तो नही हुई लेकिन कालेज में सृजित 12 सहायक टीचरों के पदों के सापेक्ष तैनात तीन टीचरों में से एक टीचर को जिले के सिंघनपुर बघारी जीआईसी विद्यालय से संबद्ध कर समस्या को और बढ़ा दिया गया है। इसी तरह प्रवक्ता के सृजित नौ पदों के सापेक्ष दो प्रवक्ताओं में से एक प्रवक्ता को जीआईसी ज्यौरइया में संबद्ध कर दिया गया। अभिभावक दिनेश कुमार और रामकिशोर ने बताया कि टीचरों के रिक्त पदों की भरपाई के लिए लगातर मांग की गई। विद्यालय स्तर से भी टीचर तैनात कराने का मांग पत्र भेजा जा रहा है। लेकिन टीचरों की नियुक्ति के बजाए सहायक टीचर और प्रवक्ता को अन्य विद्यालय में संबद्ध कर दिए जाने से शिक्षण व्यवस्था पटरी से उतर गई है। प्रधानाचार्य विजय शंकर तिवारी ने बताया कि रिक्त पदों की पूर्ति के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर से मांग लगातार की जा रही है।
जीआईसी श्रीनगर में प्रवक्ताओं और टीचरों की कमी को पूरा करने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा गया है, लेकिन टीचरों की कमी में सुधार नहीं हो पा रहा है। यह समस्या श्रीनगर नगर कालेज की ही नहीं जिले के अन्य कालेजों की भी यहीं स्थित है।
मालती राय
जिला विद्यालय निरीक्षक महोबा