महोबा सदर सीट पर इस बार तीन पूर्व विधायक आमने- सामने हैं। खास बात यह है कि ये जिस दल को मात देकर कभी जीत का सेहरा बांधे थे, अब उसी दल के टिकट पर मैदान में हैं। ऐसे में इनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हैं।
सदर सीट से सपा प्रत्याशी सिद्धगोपाल साहू वर्ष 2002 में पहली दफा विधानसभा चुनाव लड़े और जीत का सेहरा बांध विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में फिर सपा के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन सिर्फ 354 वोटों से बसपा प्रत्याशी राजनारायण बुधौलिया से हार गए।
इस दफा सपा प्रत्याशी मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने में तेजी से जुटे हैं। उनका कहना है कि गठबंधन का भी फायदा मिलेगा। बसपा प्रत्याशी अरिमर्दन सिंह दलित वोटों के साथ मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले वह 1996 में सपा के टिकट पर विधायक बने थे।
तब इन्होंने बसपा को मात दी थी। अब उन्हीं बसपाइयों के सहारे चुनावी बैतरणी पार करने में जुटे हैं। इसी तरह 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर विधान सभा पहुंचने वाले राकेश गोस्वामी इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में उन्हें भी अपनों का सामना करना पड़ रहा है।
तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी इसी सीट पर बारी-बारी से विधायक रह चुके हैं। ऐसी स्थिति में इनके बीच करो या मरो की नौबत है। खास बात यह है कि जिन नेताओं को कभी आंखें तरेरते थे। अब संबंधित दल का टिकट लेकर मैदान में उतरने के बाद उनकी चिरौरी कर रहे हैं।