महोबा। पीओसीटी कंपनी द्वारा जिला अस्पताल पुरुष व महिला में अस्थाई रूप से लैब में कार्य कर रहे सात कर्मचारियों को शासन के आदेश पर हटा दिए जाने से जिला अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। मरीजों की जांचें न होने से मरीज इधर से उधर भटक रहे हैं। जिससे मरीजों और कर्मचारियों के बीच जमकर नोकझोंक हो गई। अब लैब में जांच का कार्य करने के लिए सिर्फ एक स्थाई कर्मचारी होने से जांचें नहीं हो पा रही हैं। जिससे मशीनें शोपीस बनकर रह गई हैं।
जिला पुरुष अस्पताल में एक ऑपरेटर और तीन लैब टेक्नीशियन के पद परि कंपनी की तरफ से कार्य कर रहे थे। इसी तरह तीन कर्मचारी महिला जिला अस्पताल में लैब में कार्यरत थे। सभी कर्मचारियों की शासन ने छुट्टी कर दी। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को जारी किए गए आदेश में स्थाई कर्मचारियों से ही जांच कराने को कहा है जबकि जिला अस्पताल में मात्र एक स्थाई कर्मचारी है। इससे जांच कराने आए मरीजों को घंटों इधर से उधर जांच कराने के लिए भटकना पड़ा और उनकी जांच नहीं हो सकी।
महिला जिला अस्पताल में तीन लैब के टेक्नीशियन की भी छुट्टी कर दी गई। जिससे महिलाएं भी जांच के लिए खासा परेशान रहीं। पीओसीटी कंपनी के द्वारा रखे गए कर्मचारी लीवर जांच, सीवीपी जांच, लिपिड, शुगर, किडनी की जांच करते थे। इन कर्मचारियों के हटाने से अब जांच का कार्य बाधित हो गया है। स्थाई कर्मचारी द्वारा मशीन न चला पाने के कारण ज्यादातर जांचें नहीं हो पा रही हैं।
पीओसीटी कंपनी के तहत लैब में कार्य कर रहे कर्मचारियों को शासन का आदेश आने के बाद हटा दिया गया है। अब लैब में होने वाली जांचें यहां पर तैनात स्थाई कर्मचारियों द्वारा की जाएगी। शासन के अग्रिम आदेश के बाद ही हटाए गए कर्मचारियों पर कोई विचार किया जाएगा।
आरपी मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महोबा