प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महोबा में हुई परिवर्तन रैली अन्य रैलियों से थोड़ी अलग दिखी। इस रैली में केंद्र के काम और मोदी के नाम का डंका बजता रहा, लेकिन मंच से इस बार जयश्रीराम का नारा नहीं लगा। कार्यकर्ताओं की ओर से भी भारत माता की जयकार तो लगाई गई, लेकिन जयश्रीराम का नारा नहीं गूंजा
दो तरफ से पहाड़ी और एक तरफ से रेल लाइन से घिरे रैली स्थल के चारों तरफ केसरिया रंग छटा बिखेरता रहा। रैली स्थल पर कार्यकर्ता सुबह से ही आने लगे। मंच पर लगे मुख्य बैनर में मोदी की ललकार वाले अंदाज की तस्वीर थी और लिखा था कि बदल रहा है देश, बदलेगा उत्तर प्रदेश। बैनर में छपे भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल के फूल पर 265 प्लस लिखा था। इसके जरिए यह संदेश दिया गया कि यूपी चुनाव में लक्ष्य 265 प्लस का है।
पंडाल के हेडर पर बायीं तरफ हाथी पर सवार आल्हा तो दायीं तरफ घोड़े पर सवार रानी लक्ष्मीबाई की तस्वीर थी। इन तस्वीरों के जरिए समूचे बुंदेलखंड के हर जाति के लोगों को बांधने की कोशिश की गई। मंच से थोड़ी दूर पर दायीं और बायीं तरफ मोदी के दो कटआउट लगे थे। इनमें उन्हें गुजराती अंदाज में प्रस्तुत किया गया था। लिखा था ‘भले पाधारे जू’ ।
करीब 11 बजे मंच संचालन की जिम्मेदारी प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने संभाली। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए भारत माता के जयकारे लगवाए। प्रधानमंत्री की शान में भी नारे लगे। इसके बाद प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, साध्वी उमा भारती, साध्वी निरंजन ज्योति आदि ने लोगों को संबोधित किया। साध्वी निरंजन ज्योति को मंच पर बुलाते समय उनका निषाद समुदाय की नेता के तौर पर परिचय कराया गया। साध्वी के नारे में भी जयश्रीराम का नारा शामिल नहीं हुआ।
करीब 12.47 बजे मंच पर पहुंचीं साध्वी उमा भारती भी इस बार बदली-बदली नजर आईं। उन्होंने भी जयश्रीराम से दूरी बनाए रखी। करीब- करीब यही स्थिति अन्य वक्ताओं की भी रही। प्रधानमंत्री के काफिले में शामिल तीन हेलीकाप्टर 12.58 बजे रैली स्थल के ऊपर से गुजरे। इस दौरान नारेबाजी शुरू हो गई, लेकिन जय श्रीराम का नारा न तो मंच से लगा और न ही पंडाल से। 1.11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचे। युवाओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। पार्टी नेताओं ने पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत सत्कार किया। करीब 44 मिनट के भाषण के बाद 2.16 बजे प्रधानमंत्री वाराणसी के लिए रवाना हो गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली में संतों, वीरों और साहित्यकारों को भी याद किया गया। मंचासीन नेताओं ने बार-बार आल्हा, ऊदल से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई और संत शिरोमणि ब्रह्मानंद को याद किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनसे थोड़ा आगे बढ़े और साहित्यकारों का भी नाम जोड़ दिया। उन्होंने संतों को याद करते हुए मैथली शरण गुप्त से लेकर वृंदावन लाल वर्मा की साहित्य साधना का जिक्र करके बुंदेलियों की कर्मठता का बखान किया। स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि 1857 की क्रांति में बुंदेलखंड के किसानों का बड़ा योगदान रहा है। वही किसान आज बदहाल हैं। प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि बुंदेलखंड के लोग हर क्षेत्र में आगे हैं तो चुनाव में कैसे पिछड़ जाते हैं?
महोबा में प्रधानमंत्री रहते हुए रैली करने वाले नरेंद्र मोदी पहले नेता बन गए हैं। जानकारों की मानें तो यहां रैलियों का क्रम तो हमेशा रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पहली बार आए हैं। इससे पहले इंदिरा गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह आदि की रैलियां होती रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए कोई भी व्यक्ति महोबा नहीं आया था। ऐसे में भाजपा नेताओँ का कहना है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने एक नया रिकार्ड कायम किया है, उसी तरह से चुनाव में बुंदेलखंड से वोटों का भी रिकार्ड हासिल किया जाएगा।