कथा वाचक आचार्य उत्तम कृष्ण महाराज ने कहा कि ब्राहमण पुत्र धुंधकारी अत्याचारी दुष्ट प्रवृत्ति का था। वह अपने मां बाप को कष्ट देता था और उसने अपने बुरे कृत्यों से समाज को परेशान कर दिया था।
कथा वाचक श्रीूमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रामलला मंदिर में कथा का रसपान करा रहे थे। भागवत कथा से जुड़े कान्य कुब्ज देश के ब्राहमण आत्मदेव के पुत्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि ब्राहमण पुत्र धुंधकारी मोह के कारण इतना बिगड़ गया कि समाज में किसी से अच्छा व्यवहार नहीं करता था।
कथा वाचक ने वैराग्य की चर्चा को बताते हुए सप्ताह विधि का वर्णन किया। कहा कि मनुष्य की ये बहुत गलत भ्रांति है कि जब वह अच्छे कार्य करता है तो शुभ मुहूर्त देखता है और जब बुरे कार्य करता है तो मुहूर्त नहीं देखता।
कथा वाचक ने कहा कि संतों का मानना है कि बुरे कार्य करते समय हम मुहूर्त चिंतन करें तो हम अपने द्वारा जो बुरा कर्म करने जा रहे है तो हो सकता है कि बुरा कर्म टल जाए। उन्होंने कहा कि जब मन में अच्छे कार्य आ जाएं तो उसे तुरंत कर लेना चाहिए।
कथा दौरान कथा वाचक ने भगवान के भजन सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। कथा में अनिल मिश्रा, संतोष, रामराजा, शिवकुमार, पुरषोत्तम सहित तमाम महिलाएं पुरुष मौजूद रहे।