पुलिस की निष्क्रियता के चलते गोली कांड की घटना घटी। यदि कोतवाली पुलिस सक्रिय होती तो गोली कांड की घटना को बचाया जा सकता था। इस घटना से दोनों पक्षों के घरों में मायूसी छाई हुई है। राजनीतिक प्रतिद्वंदता के चलते हुई घटना में समर्थक बीच में पिस गए।
निर्वाचन आयोग ने असलहा जमा कराने के सख्त निर्देश दिए थे। पुलिस ने राजनीतिक दवाब के चलते सभी के असलहे नहीं जमा कराए। इतना ही नहीं कोतवाली प्रभारी जेपी यादव की निष्क्रियता के चलते सरेआम राजनीतिक दलों की गाड़ियों में समर्थक असलहे लिए घूमते रहे, लेकिन कोतवाली प्रभारी ने उनकी गाड़ियां चेक करने की जहमत नहीं उठाई।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने वाहनों की चेकिंग के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कोतवाली प्रभारी जेपी यादव चेकिंग करने में फिसड्डी साबित हुए। कोतवाल को कई बार सपा और बसपा समर्थकों की गाड़ियां भी मिली। लेकिन पुलिस ने चेकिंग करना मुनासिब नहीं समझा। इससे सपा बसपा समर्थकों में फायरिंग की घटना घटी। इससे दोनों समर्थकों के चार लोग घायल हो गए।
तड़के सुबह 3:30 बजे सपा बसपा समर्थकों के बीच गोलीकांड की खबर मिलते ही पुलिस प्रशासन के पसीने छूट गए। आनन फानन में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत पूरे जिले भर का फोर्स अस्पताल में पहुंच गया। दो घंटे तक जिला अस्पताल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के अलावा अपर पुलिस अधीक्षक राजेश सक्सेना, अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार, उपजिलाधिकारी सदर प्रबुत्र सिंह, सीओ सदर के अलावा जिले भर का फोर्स डटा रहा। घटना के 12 घंटे बाद भी पुलिस किसी भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं कर सकी।
सपा प्रत्याशी सिद्धगोपाल साहू के बेटे साकेत साहू की गोली लगने से पिता और सपा समर्थक झल्ला गए। सपा समर्थकों की अस्पताल में जमकर नोकझाेंक हुई। सपाइयों ने सपा के पूर्व जिला महासचिव वकील अहमद ने आरोप लगाया कि कोतवाली प्रभारी को रात में कई बार विपक्षी द्वारा की जा रही तानाशाही के बावत अवगत कराया गया। लेकिन कोतवाल ने कोई रुचि नहीं दिखाई जिससे यह घटना घटी।