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थम नहीं रहा अनुसूचित जाति पर अत्याचारों का सिलसिला

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महोबा। जनपद में अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं। समाज कल्याण विभाग में दर्ज आंकड़े इसके गवाह हैं। पिछले तीन वर्षों में 388 प्रकरण सामने आ चुके हैं। जिसमें 500 से ज्यादा लोग पीड़ित हुए हैं। 38 मामले लंबित हैं जिसमें सहायता राशि दी जानी हैं।
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जिले में अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार के मामले थम नहीं रहे हैं। जिसमें कुछ हालिया घटनाएं चर्चा में रही हैं। अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत समाज कल्याण विभाग पीड़ितों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जिसमें पिछले तीन सालों में अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार के मामलों में इजाफा हुआ है। पुलिस और प्रशासन को इसके लिए गंभीर होना होगा।
जून माह में यह घटनाएं रहीं चर्चा का विषय-
केस-1 नथूपुरा गांव की अनुसूचित जाति की महिला प्रधान को अफसरों के साथ मीटिंग के दौरान दबंगों ने जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर हाथ पकड़कर जबरन कुर्सी से उठा दिया था। मामले में दस लोगों पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी जिसमें अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
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केस-2 श्रीनगर क्षेत्र के तिंदौली गांव में चुनावी खुन्नस को लेकर हारे हुए प्रधान ने अनुसूचित जाति के 6 लोगों को घर में बुलाकर, बंधक बना कर मारपीट कर दी थी। पुलिस नेे दो सगे भाइयों पर रिपोर्ट दर्ज की थी जिसमें दोनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
वित्तीय वर्ष कुल प्रकरण पीड़ितों की संख्या
2018-19 106 122
2019-20 116 180
2020-21 128 193
2021-22 38 (अब तक) --
नोट- सभी आंकड़े समाज कल्याण विभाग से प्राप्त हैं
क्या कहते अफसर-
अनुसूचित जाति के जो मामले दर्ज होते हैं उनकी विवेचना कराई जाती है दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाती है। आंकड़े बढ़ने की जानकारी वह देखकर बता पाएंगे।
आरके गौतम, अपर एसपी
अनुसूचित जाति अत्याचार के मामले में पीड़ितों को अपराध की प्रकृति के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाती है। 38 मामलों को लेकर कार्रवाई चल रही है जल्द ही उनके खाते में धनराशि भेजी जाएगी।
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अशोक कुमार मिश्रा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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