स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में पुराने नोटों से वैट की धनराशि जमा न होने से व्यापारी परेशान हैं। परेशान अधिकारियों ने डीएम से बैंक में अन्य जिलों की भांति वैट जमा कराने की गुहार लगाई है। वहीं, राजस्व घटने से विभाग के आला अफसरों की नींद उड़ गई है।बड़े नोट का चलन बंद हो जाने के बाद स्टेट
बैंक ने वैट की धनराशि जमा कराना बंद कर दिया। जिससे जिले के व्यापारी परेशान हो गए और बकाएदारी से बचने के लिए उन्होंने डिप्टी कमिशभनर कार्यालय में अधिवक्ताओं और अधिकारियों के साथ बैठक की। वाणिज्यकर के डिप्टी कमिश्नर आरपी त्रिपाठी ने बताया कि भारत सरकार ने 8 नवंबर को
नोट बंद करने के गजट के बाद 10 नवंबर को नया संशोधित गजट जारी किया। जिसमें राजस्व देनदारी के लिए पुराने नोट बैंकों को स्वीकार करने के निर्देश गजट संख्या 3408 में दिए गए हैं। फिर भी स्टेट बैंक वैट की राशि जमा नहीं करा रहा है। अधिवक्ता प्रदीप गुप्ता ने कहा कि गाजियाबाद ललितपुर झंासी
सहित सभी जिलों में पुराने नोट पर वैट बैंक स्वीकार कर रही है।असिस्टेंट कमिश्नर अरविंद कुमार पांडेय ने कहा कि बैंक के आरएम बांदा से भी बात कर चुके हैं लेकिन वैट बैंक नहीं जमा करा रहा। बैठक के बाद अधिकारी डीएम वीरेश्वर सिंह से मिले उन्होंने बैंक प्रबंधन से बात कर कार्रवाई का भरोसा दिया।
एसबीआई के बरिष्ठ प्रबंधक अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि जब तक उच्चधिकारियों के निर्देश नहीं मिल जाते कोई भी सरकारी जमा पुराने नोटों पर नहीं किया जा सकता। खाते से चैक द्वारा वैट सहित सभी प्रकार के जमा स्वीकार किए जा रहे हैं। बैठक में सीटीओ अमित कुमार, जगदीश कुमार, कालूराम, अरूण पुरवार, धीरेंद्र, ह्रदेश गुप्ता, ब़ृजेंद्र, नीरज वर्मा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।