रमजान माह में सिवईं का कारोबार तेज हो गया है। प्रतिदिन कारखाने में दो क्विंटल से ज्यादा सिवई तैयार की जा रही है। रोजेदार सहरी के समय सिवईं का इस्तेमाल ज्यादा करते है, इसलिए रमजान माह में सिवईं की खपत बढ़ जाती है।
मुबारक माह शुरू होते ही सिवईं के कारखानों में भट्ठियां धधकने लगी हैं। सिवईं बनाने का काम दिन रात चल रहा है। ईद में सिवईं की बिक्री सबसे अधिक होती है। इसलिए कारखाना संचालक सिवईं बनाकर स्टाक कर रहे हैं। जिससे ईद में सिवईं कम न पड़ सके। रोजों में अतिरिक्त कारीगर लगाकर सिवईं बनाई जा रही है।
जिले के अलावा आसपास के कस्बों में भी सिवईं के कारखाने लगे है। शहर के बुजुर्ग बताते हैं कि दो दशक पहले घर में सिवईं हाथ से तैयार की जाती थी। महिलाएं और पुरुष मिलकर सिवईं तैयार करते थे। वह सिर्वइं बेहद मुलायम और शुद्ध होती थी, लेकिन अब लोगों ने घरों में सिवईं बनाना बंद कर दिया है। अब लोग बाजार की सिवईं से काम चला रहे हैं।