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सूखे के चलते मंडियों से अनाज गायब

Mon, 14 Dec 2015 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
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 जिले में सूखे के हालात का असर गल्ला मंडियों में भी दिखाई देने लगा है। गल्ला मंडी से गेहूं पूरी तरह गायब हो गया है। मंडी में खाद्यान्न सामग्री नाममात्र की आने से गल्ला मंडियां सूनी हो गई है। गल्ला व्यापारी और आढ़ती हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। जिससे प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
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जिले में 70 फीसदी लोग कृषि पर आश्रित हैं। यहां पर 2.15 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी की और 21 हजार हेक्टेयर भूमि पर खरीफ की फसल की पैदावार होती है। मंडी समिति महोबा में प्रति दिन करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, लेकिन इस साल बारिश न होने के कारण खेतों में जुताई बुवाई न हो पाने से पहले खरीफ की फसल खत्म हो गई, अब रबी की फसल में भी महज पांच फीसदी खेतों में बुवाई हुई है, जिसके चलते 95 फीसदी भूमि परती पड़ी है।
पिछले दो सालों से अतिवृष्टि और सूखे के चलते पैदावार न होने से मंडी समितियों में खाद्यान्न नहीं पहुंच रहा है, जिससे गल्ला कारोबारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। थोक गल्ला कारोबारी विनोद पुरवार, आलोक पुरवार, विवेक गुप्ता, भूपेंद्र साहू, राकेश गुप्ता, राकेश शर्मा का कहना है कि दो सालों से सूखे के चलते कारोबार पर विपरीत असर पड़ा है। हालत यह है कि प्रतिदिन 2000 से 2500 क्विंटल आने वाला गेहूं मंडी से गायब है।
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 तमाम गल्ला कारोबारी काम न चलने से मध्यप्रदेश में कारोबार करने चले गए हैं। सर्दी के दिनों में गल्ला मंडियों में तिल, मूंगफली, उर्द, मूंग से पटी रहती थी, लेकिन इस साल पैदावार न होने से इक्का दुक्का किसान फसल लेकर आ रहे हैं।

मंडियों में खाद्यान्न न आने से पल्लेदार बेकार
सूखे के चलते मंडी समितियों में फसल न आने से मंडी में काम करने वाले पल्लेदारों और श्रमिकों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। मंडी की करीब एक हजार पल्लेदार बेकार हो गए हैं। काम न मिलने से तमाम पल्लेदार घर बैठने को मजबूर हैं, जबकि कुछ पल्लेदार और श्रमिक आज भी मंडी में गेहूं, चना, मूंगफली, तिल, उर्द आदि आने का इंतजार करते रहते हैं।

मंडियों से एक ट्रक की हो रही लदान
सूखे के चलते मंडी समिति महोबा छोड़ सभी मंडियां पिट गई हैं। चरखारी, बेलाताल, खरेला, पनवाड़ी, कबरई सहित आधा दर्जन मंडियों से प्रतिदिन 15 से 20 ट्रक खाद्यान्न कानपुर भेजा जाता था, लेकिन इस साल फसल न होने के कारण मंडियों से बमुश्किल एकाध ट्रक की ही प्रतिदिन लदान हो रही है।
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मंडियां पूरी तरह पिट गई हैं। यहां पर काम करने वाले कारोबारी भी खासा परेशान हैं। सारा दिन मंडियों में सन्नाटा पसरा रहता है।

फसल       - 2014 में फसल की आमद प्रति कुं. - 2015 प्रतिदिन फसल की आमद
  राई        -      200 से 250                  -        50 से 60
 चना       -       300 से 350                 -         50 से 80
तिली       -       1400 से 1600              -         100 से 150
मूंगफली    -       1600 से 1800              -         1000 से 1200
उर्द        -        900 से 1000                -         90 से 100
गेहूं        -        2200 से 2500              -          00
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