बधियाकरण के बाद साड़ों के कान में लगाया गया तेग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अन्ना जानवरों से परेशान किसानों के लिए राहत भरी खबर है। पशु पालन विभाग ने अन्ना जानवरों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए बधियाकरण की प्रक्रिया शुरू की है। आवारा साड़ाें का बधियाकरण कर उनके कान में तेग भी लगाया जा रहा है। इसमें उसका नंबर अंकित होता है।
बुंदेलखंड में अन्ना जानवर किसानों की गले की हड्डी बन चुके है। इन आवारा जानवरों से फसल को बचाने के लिए किसान खेतों पर रहते है। कुछ किसानों ने तार बाड़ी कराई है, जिससे फसल को अन्ना जानवरों से बचाया जा सके। अन्ना जानवर झुंड बनाकर खेतों में घुसकर रातों-रात दर्जनों बीघा भूमि की फसल बर्बाद हो रही है। इससे किसानों को मेहनत व खाद बीज की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
इस समस्या के समाधान को लेकर पशु विभाग ने अभियान शुरू किया है।
पशुपालन विभाग द्वारा आवारा साड़ों का बधियाकरण किया जा रहा है। तहसील कुलपहाड़ क्षेत्र के 154 साडा़ें का बधियाकरण किया गया है। पूर्व ब्लाक प्रमुख राजेश चौबे कहते है कि इससे पशुधन में कमी आएगी। जो कृतिम गर्भाधान के कार्यक्रम चल रहे है, उसे सरकार को मुक्त कर देना चाहिए। क्योंकि गरीब किसान पैसा खर्च करने में सक्षम नहीं है। भारत सिंह यादव का मानना है कि सरकार को ऐसी योजना चलानी चाहिए जिसमें गाय को पालने वाले किसान को प्रोत्साहन राशि मिले।