कभी पानी से लबालब रहने वाले चरखारी ब्लाक के 198 तालाब बारिश न होने से खाली पड़े हैं। पानी के अभाव में कई तालाब खेल का मैदान बन गए हैं। स्थाई जल स्रोतों के सूखने से ग्रामीण भी परेशान हैं क्योंकि उनके मवेशी भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
सूखे की मार से कराह रहे ग्रामीणों के सामने पानी का संकट दिन पर दिन गहराता जा रहा है। पेयजल संकट से अधिक ग्रामीणों को मवेशियों और घरेलू उपयोग के लिए पानी की तलाश करनी पड़ रही है। बारिश न होने से ब्लाक क्षेत्र के 198 तालाब और पोखरों में पानी नहीं है।
सूखे पड़े तालाबों के इर्द गिर्द विचरण कर मवेशी गांव के अंदर बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पशुओं के लिए पानी जुटाने के लिए पशुपालक कड़ी मशक्कत करने को मजबूर हैं। चरखारी ब्लाक क्षेत्र के कभी जलहीन न होने वाले सुदामापुरी, रिवई, ऐंचाना, बारी, धवारी, बसौठ, पुन्निया जैसे क्षमतावान तालाब सूखे पड़े हैं।
कभी इन तालाबों से मवेशियों और ग्रामीणों को पानी की सुविधा के साथ साथ सैकड़ों बीघा जमीन की सिंचाई हो जाती थी। लेकिन बारिश न होने से फसल की बुवाई नहीं हुई। कृषक ऐंचाना के नरेंद्र तिवारी, पुन्निया निवासी जगनंदन आदि अकाल जैसे हालात बनने से खासे चिंतित हैं।
पशु पालक नरेंद्र पटैरिया, क्षेत्र पंचायत सदस्य मोतीलाल अहिरवार आदि ने कहा कि क्षेत्र के तालाबों में पानी न होने की वजह से कई तालाबों को गांव के बच्चों ने खेलकूद का मैदान बना लिया है। जहां सुबह से शाम तक बच्चे क्रिकेट व अन्य खेल खेलते हैं। इन्हीं तालाबों में गांव स्तरीय टूर्नामेंट का आयोजन होता है।