जिले में इस दफा गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। अभी तक जिले में महज 8200 मीट्रिक टन की खरीद हो सकी है। जबकि गेहूं खरीद का समय खत्म होने में महज पांच दिन शेष रह गए हैं। गेहूं क्रय केंद्रों पर सारा दिन संनाटा पसरा रहने से केंद्र संचालक भी हाथ पर हाथ धरे बैठे है।
पिछले साल जिले में 16 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इस साल गेहूं का उत्पादन कम होने और अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हो गई थी। जिससे विभाग ने इस वर्ष 13 हजार मीट्रिक टन रखा गया है, लेकिन विभाग को इतना भी लक्ष्य पूरा करने में मुश्किल हो रही है। स्थिति यह है कि क्रय केंद्रों पर गेहूं न आने से खरीद केंद्रों में संनाटा छाया हुआ है। डिप्टी आरएमओ द्वारा क्रय केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं देने के बाद भी केंद्रों में गेहूं नहीं पहुंचा। जिससे क्रय केंद्रों पर तैनात कर्मचारी सारा दिन बैठे रहते है। जिले में इस वर्ष पनवाड़ी, बेलाताल, अजनर, कुलपहाड़, चरखारी, ख्ररेला, महोबा, श्रीनगर, खन्ना में 25 गेहूं क्रय केंद्र खोले गए है । इन क्रय केंद्रंों पर अभी तक 13000 मीट्रिक टन के सापेक्ष 8200 मीटिक टन गेहूं खरीदा गया है, जो लक्ष्य से काफी कम है। शासन स्तर से इस साल गेहूं खरीद की अंतिम तिथि 20 जून से घटाकर 15 जून कर दी गई है, जिससे लक्ष्य पूरा हो पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। क्रय केंद्रों पर कर्मचारियों की तैनाती के साथ तराजू, बांट और पानी और छाया की व्यवस्था कर दी गई थी। खरेला प्रतिनिधि के मुताबिक खरेला कस्बे में साधन सहकारी समिति द्वारा खोले गए क्रय केंद्र को 2000 टन गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष अभी तक 9 टन खरीद हो सकी है।