नोटबंदी से अब मिडडे मील पर भी संकट छा गया है। बैंकों में मिडडे मील की चेकें भी क्लीयर नहीं हो रही हैं। पूरा पैसा न मिलने से प्रधानाध्यापक बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मिड्डे मील के खाते बैंकों में होने के कारण प्रधानाध्यापकों को मिडडे मील का भुगतान निकालने के लिए बैंक में घंटों लाइन में
लगना पड़ रहा है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं, नंबर आने पर बैंक प्रबंधक पूरी चेक का भुगतान नहीं कर रहे हैं। बल्कि दो किश्तों में चेक लाने के लिए दबाव बना रहे हैं। इससे प्रधानाध्यापकों में खासा आक्रोश है। समय से भुगतान न होने से मिडडे मील प्रभावित होने के आसार बढ़ते जा रहे है।