कबरई (महोबा)। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बेमतलब साबित हो रही है। जिन वर-वधू ने सामूहिक विवाह में भाग लिया उनमें अधिकांश वधू अपने साजन के घर नहीं पहुंची। किसी की दो सप्ताह बाद तो किसी चार सप्ताह बाद शादी है। जिसको लेकर रिश्तेदारों को कार्ड बांट दिए गए हैं। सामूहिक विवाह समारोह में महज रस्म अदायगी की गई है। जिससे सरकार द्वारा दी धनराशि मिल सके।
11 दिसंबर को जिले में 263 जोड़ों की प्रशासन ने शादी कराई। जिसकी हकीकत की परतें खुलने लगी हैं। सम्मेलन में कुल विवाहों के 80 फीसदी से अधिक जोड़ों ने एक दूसरे से विवाह की रस्म अदायगी किए बिना ही केवल जयमाला डालकर धनराशि व दहेज तथा जेवरात प्राप्त कर लिए हैं।
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केस-1 18 फरवरी को बेंदों से हरीसिंह के पुत्र रूपेंद्र की बारात कस्बे के विवेक नगर आनी है तो वही बम्हौरी कला के मोतीलाल के बेटे प्रदीप व कदौरा के हरीशंकर के पुत्र भूपसिंह का 16 फरवरी को कस्बे के आंबेडकर नगर में विवाह होना तय है। जिसको लेकर रिश्तेदारों को कार्ड बांट दिए गए हैं।
केस-2 11 जनवरी को महेवा के शंकरदीन कुशवाहा के पुत्र प्रदीप की बारात धरौन जानी है। जिसको लेकर परिजनों द्वारा तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन द्वारा वैवाहिक योजना का लाभ लेकर अब पैसा खर्च कर शादी होगी।
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क्या बोले जिम्मेदार-
सामूहिक विवाह समारोह में विधिवत शादी की सभी रस्में अदा की जाती है। अगर कोई दोबारा से शादी कर रहा है तो इसकी जानकारी नहीं हैं। मामले की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार, समाज कल्याण अधिकारी