बुंदेलखंड में सूखे के हालात का जायजा लेने आ रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम से एक ओर जहां ग्रामीण उत्साहित हैं, वहीं नेताओं की हवा-हवाई घोषणाओं से आहत भी है। सूपा गांव के लोगों का कहना है कि का होत है, नेता आवत तौ है, पर देत कछु निहायं। इसके बाद भी कुदरत की मार से त्रस्त ग्रामीण राहुल गांधी से अपनी व्यथा सुनाने को आतुर हैं।
गुरुवार को सुबह 11 बजे सूपा गांव पहुंची ‘अमर उजाला’ की टीम ने कुएं के किनारे बैठे दो ग्रामीणों से बात की। ये लोग बकरियों के लिए पत्ते काटने के लिए हंसिया तैयार कर रहे थे। दयाशंकर और कालीचरन ने बताया कि गांव के 98 फीसदी खेतों में बुवाई नहीं हुई है। खाने के लाले पड़े है। परिवार चलावै के खातिर आधा गांव मजदूरी करबे कौ बाहर भाग गौ है। जानवर भूखन मरत हे। ईसे जादा हालात कबहुं खराब नहीं भे। 11.30 बजे टीम गांव के अंदर पहुंची तो कुछ लोग गपशप कर रहे थे। पूछते ही बोल पड़े साहब गांव में कछु निहायं, खेती की बुवाई न होबे के कारण घर मा अनाज तक बढ़ागा है। राहुल गांधी के कार्यक्रम की जानकारी की बाबत पूछा तो ग्रामीण बोल पड़े बड़े नेता आवत हे, उनके पास जइबे और गांव मा ट्यूबवेल लगवाबे की मांग करबे, मिली ता मिली नहीं घर वापस आ जाबी। इसी बीच धनुआ बोल पड़ा नेतन के आबे का होत है, आबत तौ हैं पर देत कछु निहायं। दोपहर 12 बजे गांव के कुछ आगे बढ़ते ही देखा कि ग्रामीण खड़े है। राहुल गांधी के कार्यक्रम के बारे में पूछने पर बोले कि हियां सूखे से मड़ई परेशान है। नेता सिर्फ आपन नेतागिरी की रोटी सेकन आवत हे। 15 दिना में तमाम दलन के नेतन ने देहरी खौंद डारिस, पर कौनो का भला न भा, अब ई का करिहैं इनकी तो सरकारे निहायं, लेकिन राहुल का देखन जरूर जइबै।