फसलों को बचाने के लिए खेतों के आसपास लगाई गई करंटबाड़ी और आरीबाड़ी अन्ना पशुओं के लिए जानलेवा बन गई है। इससे कई पशुओं की मौत हो चुकी है। घेरबाड़ी से बड़ी संख्या में अन्ना पशुओं के घायल होने से पशु पालकों में आक्रोश है। इन्हाेंने घेरबाड़ी को हटवाए जाने की मांग एसडीएम से की है।
जिले में इस वर्ष बारिश न होने से करीब दस फीसदी फसल बोई गई। इस फसल को बचाने की कोशिशें गोवंश के लिए जान का खतरा बन गई हैं। ब्लाक चरखारी के ग्राम कीरतपुरा, कांकुन, बैहारी और जुड़े सिजौरा मौजे में किसानों ने अन्ना पशुओं से फसल को बचाने के लिए खेतों के चारों तरफ आरीबाड़ी और करंटबाड़ी लगाई हैं।
भूख से बेहाल मवेशियों के खेत में घुसने के प्रयास में यह घेरबाड़ी की चपेट में आकर गंभीर घायल हो जाते हैं। इससे इनकी जान पर बन आती है। घेरबाड़ी से गोवंश पर संकट देख पशु पालकों में आक्रोश पनपने लगा है। समाजसेवी कृष्णकांत, बबलू, महिपत, आनंद मिश्रा, भगवानदास, लक्ष्मीप्रसाद, शिवपत, पप्पू मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद, रामस्वरूप, शीलू आदि ने चरखारी उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर घेरबाड़ी हटवाने की मांग की है।
इनका कहना है कि कांकुन क्षेत्र में घायल और मृत पड़े अन्ना पशुओं के मामले की जांच भी कराई जाए। इस मामले में तहसीलदार प्रबुद्ध सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत मिली है। राजस्व कर्मियों को मौके पर भेज कर अनाधिकृत तरीके से लगाई गई घेरबाड़ी की जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी।