फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब गन्ना ही लगाएगा किसानों के जख्मों पर मरहम

Tue, 28 Apr 2015 06:12 PM IST
हरवीर सिंह, अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
विज्ञापन
जनपद में गेहूं, दलहन एवं तिलहन की फसल की उत्पादकता गिरने से किसानों को जबरदस्त झटका लगा है। जिले के किसान आर्थिक तंगी की मार से बेहाल है। बारिश से फसलों को नुकसान होने के बाद जिले के करीब किसानों 81 प्रतिशत किसान की नजर अब गन्ना भुगतान पर है।
विज्ञापन


ओलावृष्टि एवं बारिश से तबाह हुई फसलों के मुआवजे और सर्वे के कोलाहल में गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा दब गया है।

बिजनौर जनपद में वेस्ट यूपी में गन्ना उत्पादन करने के मामले में पहले एवं पूरे उत्तर प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। यहां से अधिकतर किसान गन्ने की फसल पर ही आश्रित हैं। गेहूं की बुआई भी ज्यादातर किसान गन्ने की कटाई के बाद खाली होने वाले खेतों में करते हैं। बिजनौर जनपद की बात करें तो यहां पर 65 फीसदी रकबे में गन्ने की बुआई की जाती है। 81 प्रतिशत किसानों के लिए गन्ना मुख्य फसल है।

इस बार बारिश एवं ओलावृष्टि से दलहन, तिलहन और गेहूं की फसल को जबरदस्त नुकसान हुआ है। हालांकि प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे को नुकसान की हकीकत मानें तो जनपद में दलहन, तिलहन एवं गेहूं की फसल को पांच से 20 प्रतिशत नुकसान हुआ है। प्राकृतिक आपदा से धामपुर तहसील में सबसे ज्यादा नुकसान माना जा रहा है।
विज्ञापन


सूबे में महज 58 फीसदी गन्ने का ही भुगतान

गेहूं, दलहन, तिलहन एवं सब्जी की फसल का उत्पादन गिरने के बाद किसानों की आस अब गन्ने की फसल के भुगतान से ही है। गन्ना विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सूबे में 240 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से महज 58 प्रतिशत ही गन्ने का भुगतान हुआ है।

प्रदेश की 118 शुगर मिलों पर गन्ने का 240 रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार 7411 करोड़ का बकाया है। इसके अलावा अवशेष 40 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 2840 करोड़ रुपया बकाया है। यानी किसानों का दस हजार करोड़ रुपये से भी अधिक मिलों पर बकाया है।

सहारनपुर मंडल में 50 प्रतिशत, मेरठ में 35 प्रतिशत, मुरादाबाद मंडल में 59 प्रतिशत, बरेली मंडल में 61 प्रतिशत, लखनऊ में 65 प्रतिशत, फैजाबाद में 64 प्रतिशत, देवीपाटन में 61 प्रतिशत, गोरखपुर में 66 प्रतिशत, देवरिया में 58 प्रतिशत गन्ने का भुगतान हुआ है।

नजीबाबाद तहसील के गांव चमरौला के किसान दिगंबर सिंह का मानना है कि किसान आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। अगर किसानों को समय से गन्ने का भुगतान मिल जाए तो फसल को समय पर लागत देकर किसान आगामी सीजन में अपनी स्थिति सुधार सकता है। फसल नुकसान का सही तरह से सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने के साथ साथ यह भी सबसे आवश्यक है कि सरकार किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान दिलाए।

उधर, डीसीओ ओपी सिंह का कहना है कि जिले में 240 रुपये प्रति क्विंटन के हिसाब से 71 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। अवशेष भुगतान को कराने के लिए मिलों पर दबाव बनाया जा रहा है। सभी मिलों को किसानों की आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए नोटिस भी जारी किये जा चुके हैं।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें