जून 2013 में लैपटाप वितरण कार्यक्रम में जिले आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की 13 घोषणाआें में श्रीनगर को ब्लाक का दर्जा दिलाया जाना भी शामिल था। सीएम के वादे के बाद ही तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने श्रीनगर में ब्लाक की तैयारियाें को लेकर भूमि के प्रस्ताव मांगे। ग्राम पंचायत श्रीनगर द्वारा कानपुर-सागर हाईवे पर जिला समाज कल्याण विभाग की जर्जर दुकानें व एक एकड़ से अधिक निष्प्रयोज्य जमीन उपलब्ध कराई गई थी। जिस पर डीएम ने ब्लाक कार्यालय की व्यवस्था के साथ-साथ मोहल्ला कुल्लाई पहाड़ी में ब्लाक कालोनी के लिए एक एकड़ भूमि का चयन किया था। साथ ही लेखपालाें को प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। ब्लाक की अस्थाई बिल्डिंग के लिए मोहल्ला मनोहरगंज में पुराने अस्पताल को पुट्टी और मरम्मत कराकर तैयार करा लिया गया था। इसके अलावा राज्य वित्त से रंग रोगन और सफाई का कार्य कराया गया था। जिलाधिकारी के स्थानांतरण के होने से श्रीनगर का ब्लाक बनाने का मामला खटाई में पड़ गया है। उधर मुख्य विकास अधिकारी शिवनारायण का कहना है कि प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही आगे का कार्य कराया जाएगा।
अब तक स्वीकृति न मिलने लोग निराश
श्रीनगर को ब्लाक का दर्जा मिलने में शासन की स्वीकृति अब तक न मिलने से गांव के लोगों के चेहराें पर भी निराशा झलक रही है। ग्राम प्रधान श्रीनगर यशोदा, पूर्व प्रधान कैमाहा शत्रुघ्न सिंह, सिजवाहा की गौरीबाई, ननौरा की प्रेमारानी ने बताया कि सीएम के वादे और डीएम द्वारा तेजी से की जा रही तैयारियाें को देखकर लोगों को लगा था ब्लाक स्तर के कार्य के लिए लोगों को दूर नहीं भागना पड़ेगा। लेकिन शासन की स्वीकृति न मिलने से मामला अधर में लटक गया है।
1995 से उठाई जा रही मांग
श्रीनगर को ब्लाक का दर्जा दिलाए जाने की मांग 1995 से महोबा के जिला बनते ही उठने लगी थी। कई बार ग्राम विकास आयुक्त को भेजे गए पत्र के बाद भी शासन ने ध्यान नहीं दिया। इसके साथ ही पूर्व राज्यपाल मोतीलाल बोहरा से भी क्षेत्रीय लोगों ने ब्लाक का दर्जा दिलाए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा वादा करने के बाद उम्मीद की किरणें शासन की ढिलाई के चलते निराशा में बदल गई हैं।