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ट्रक ने छात्र को कुचला, ग्रामीणों ने हाईवे किया जाम

Sun, 13 Nov 2016 10:24 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला महोबा
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छात्र की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया हाईवे में जाम। - फोटो : Amar ujala
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कानपुर-सागर हाईवे पर एक ट्रक ने सड़क पार कर रहे छात्र को कुचल दिया। हादसे में छात्र की मौके पर ही मौत हो गई। जिससे गुस्साए ग्रामीणों ने हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एसडीएम, सीओ व पूर्व राज्यमंत्री ने जाम खुलवाया।
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थाना कबरई के ग्राम बरबई निवासी धीरू (11) पुत्र स्व. वासुदेव प्रजापति प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र था। रविवार दोपहर करीब 12 बजे को कानपुर-सागर मार्ग पर तमौरा संपर्क मार्ग के पास छात्र सड़क क्रास कर रहा था। तभी कानपुर की ओर से आ रहे ट्रक ने छात्र को कुचल दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। छात्र की मौत से बौखलाए ग्रामीणों ने शव रखकर हाईवे जाम कर दिया। परिजन व ग्रामीण स्पीड ब्रेकर बनवाने और मृतक के परिजनों को 5 लाख मुआवजे देने की मांग करने लगे। दुर्घटना के बाद चालक ट्रक लेकर मौके से भाग निकला। पुलिस ने सूचना पाकर उसे अलीपुरा के पास पकड़कर खन्ना थाने के सुपुर्द कर दिया।

दोपहर एक बजे से कानपुर-सागर हाईवे पर खन्ना तक 8 किमी लंबा जाम लग गया। चार घंटे तक लगे जाम में यात्री वाहनों में बैठे पानी तक के लिए परेशान हो गए। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जाम न खुलता देख थानाध्यक्ष खन्ना ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। सूचना पर एसडीएम प्रबुद्ध सिंह, सीओ धनंजय सिंह, पूर्व राज्य मंत्री सिद्धगोपाल साहू, कबरई एसओ अमित भड़ाना ने लोगों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया। प्रशासनिक अधिकारियों व पूर्व राज्यमंत्री ने हर संभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पति के बाद इकलौता चिराग भी बुझ गया   
छात्र धीरू की मौत की खबर गांव आते ही मातम छा गया। दुर्घटना में विधवा मां का इकलौता चिराग बुझ गया। इकलौते बेटे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्राम बरबई निवासी धीरू के पिता वासुदेव की 10 साल पहले मौत हो चुकी है। मृतक वासुदेव की पत्नी शिवदेवी किसी तरह बच्चे की परवरिश कर रही थी। एक साल की उम्र में पिता का बेटे के सिर से साया उठ जाने के बाद 11 साल तक बेटे को पाल पोश कर बड़ा किया।

मां को क्या पता था कि उसके बुढ़ापे की लाठी बीच में ही टूट जाएगी। स्थिति यह है कि अब विधवा शिवदेवी के घर में कोई चिराग जलाने वाला तक नहीं बचा है। मां इकलौते बेटे की मौत के बाद से बदहवास हालत में है। गांव की तमाम महिलाएं पहुंचकर सांत्वना दे रही हैं। लेकिन शिवदेवी रोते-रोते बेहोश हो जाती है।
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