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क्रशर यूनियन की हड़ताल के चलते पत्थर कारोबार ठप

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कबरई (महोबा)। प्रदेश सरकार की नई खनिज नीति के विरोध में शनिवार से क्रशर यूनियन ने अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है। जिससे पत्थर मंडी में सन्नाटा छा गया है। पहाड़ों और क्रशरों में खनन कार्य न होने से ट्रक और डंपरों का आवागमन बंद हो गया है। इससे 20 हजार श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। हड़ताल के चलते डेढ़ सैकड़ा से अधिक पहाड़ों में जहां शनिवार को कामकाज नहीं हुआ। वहीं क्रशर प्लांटों के पहिये भी रुके रहे।
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कबरई मंडी में 300 से अधिक क्रशर प्लांट और 150 से अधिक पहाड़ है। जहां पर 20 हजार श्रमिक काम करता है। साथ ही 10 हजार करोड़ से अधिक का यहां का सालाना गिट्टी का कारोबार होता है। प्रदेश सरकार ने 30 मई 2017 को नई खनिज नीति लागू कर पुरानी पट्टा प्रणाली बंद कर दी और टू बिड ई-निविदा प्रणाली लागू कर दी (दो बार नीलामी कराना)। जिससे रॉयल्टी के रेट बढ़कर 160 से 650 रुपये तक प्रति घनमीटर हो गए जबकि पड़ोसी सीमावर्ती राज्य मध्यप्रदेश में रॉयल्टी की दर 102 रुपये प्रति घन मीटर ही है। वहां ई नीलामी आज तक लागू नहीं हुई। नतीजतन कबरई मंडी की तुलना में एमपी का कारोबार बढ़ता गया और कबरई मंडी बंद होती गई। यहां जितने की रॉयल्टी मिलती है एमपी में उतने ही राशि में रॉयल्टी सहित गिट्टी मिल जाती है। जिस कारण कबरई मंडी के सब ट्रक एमपी जाने लगे और कबरई का कारोबार बंद होता जा रहा है। इसी दूषित खनिज नीति के विरोध में क्रशर यूनियन ने शनिवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल कर दी है।
इंसेट
ट्रकों की आवाजाही रोकने के लिए बनी टीम
कबरई। हड़ताल से पहले सुबह क्रशर और पहाड़ संचालक क्रशर यूनियन कार्यालय अलीपुरा में एकत्र हुए सर्वसम्मति से कानपुर रोड और बांदा रोड में ट्रकों की आवाजाही रोकने के लिए 50-50 सदस्यीय टीमों का गठन किया गया। जो दिन-रात शिफ्ट में ट्रकों की आवक रोकेगी। पहले दिन यूनियन अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में दोनों हाइवे में ट्रक चालकों को हड़ताल के बारे में बताया गया ताकि हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्टर गिट्टी लोडिंग के लिए ट्रक भेजकर परेशान न हो। चालकों का टीका कर भोजन पानी के लिए खर्च भी दिया जा रहा है।
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