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अभिभावक बच्चे की प्रथम पाठशाला : खरे

Tue, 24 Nov 2015 11:53 PM IST
अमर उजाला महोबा
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 सरस्वती विद्या मंदिर चरखारी में अभिभावक संघ का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने शिक्षा पर विचार व्यक्त करते हुए अभिभावक को बच्चे की प्रथम पाठशाला बताया। इस मौके पर अभिभावकों ने शिक्षा को बेहतर बनाने के सुझाव दिए।  
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनोद खरे ने कहा कि बच्चों का भविष्य टीचर और अभिभावकों के हाथ में होता है। टीचर शिक्षा के माध्यम से छात्र का मार्गदर्शन करते है तो माता पिता उसमें संस्कारों को भरने का काम करते है। बच्चे को शुरुवाती शिक्षा का ज्ञान माता- पिता से ही मिलता है।
 अभिभावक ही बच्चों की प्रथम पाठशाला होती है, इसलिए माता पिता को बच्चों की रोज की प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर अभिभावक संघ के अध्यक्ष शिवकुमार गोस्वामी ने कहा कि समय के साथ-साथ शिक्षा का स्वरूप बदल गया है, जो पहले की शिक्षा होती थी वह बच्चों के हित के लिए कारगर हुआ करती थी, लेकिन आज शिक्षा व्यवसाय बन गई है।
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 नई नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा का स्वरूप बदल दिया गया है।  उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक और सामाजिक शिक्षा पर भी अभिभावक और टीचर को विशेष ध्यान देना चाहिए। सम्मेलन में संघ द्वारा अभिभावकों से विद्यालय में शिक्षा को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव मांगे गए। इस मौके पर विद्यालय के प्रबंधक जितेंद्र सेंगर, प्रधानाचार्य हम्मीर सिंह, महेंद्र यादव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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