फोटो 11 एमएएचपी 10 परिचय-घटनास्थल पर ग्रामीणों से जानकारी लेते चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के डीआईजी
महोबा। दीदी हमें भूख लगी है, घर जा रहे हैं यह शब्द तीनों बहनों ने अपनी बड़ी बहन रेखा से आखिरी बार कहे। यह सुनकर रेखा ने तीनोंं छोटी बहनों को खेत के बाहर से निकली सड़क पार कराई लेकिन तीनों बहनें घर नहीं पहुंचीं और देर रात उनके शव कुएं में उतराते मिले।
आरी निवासी रामलाल अहिरवार के दो पुत्र व पांच बेटियां थीं। चार बहने अक्सर गाय लेकर खेत जाती थीं। बड़ी बहन रेखा गाय को देखे रहती थी जबकि तीनों छोटी बहनें रुचि, दीक्षा और पुष्पा पास में ही खेलती रहती थीं।
सोमवार को मां व दादी अस्पताल चले गए जबकि पिता किसी कार्य से बाहर गए। घर पर सबसे बड़ी बहन रेश्मा व भाई धीरज थे। सबसे छोटा बेटा एक माह का होने के चलते वह मां अनुसुइया के साथ था। बड़ी बहन रेखा ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे रुचि ने भूख लगने की बात कही। अन्य बहनें भी घर जाने की जिद करने लगीं। छोटी बहनों को भूख लगने और घर जाने की बात कहने पर उसने तीनों को सड़क पार करा दिया। दोपहर करीब तीन बजे ग्रामीणों ने तीनों बालिकाओं को कुएं के पास खेलते देखा।
देर शाम तक उनके घर न पहुंचने पर तीनों के लापता होने की जानकारी हुई। तब खोजबीन करने पर उनके शव कुएं में उतराते मिले।
फोटो 11 एमएएचपी 10 परिचय-घटनास्थल पर ग्रामीणों से जानकारी लेते चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के डीआईजी
फोटो 11 एमएएचपी 10 परिचय-घटनास्थल पर ग्रामीणों से जानकारी लेते चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के डीआईजी
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