= संवेदनाएं दफन, डीएम के आगे पीछे घूमे अफसर
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिला अस्पताल के निरीक्षण पर पहुंचे डीएम के सामने मृतक मासूम के चचेरे बाबा फफक पड़े। उन्होंने व्यथा सुनाते हुए कहा, साहब डॉक्टरन की लापरवाही से हमार बच्चा चला गवा।
उन्होंने डीएम से कहा कि हम गरीब आदमी हन, अब आपै न्याय दिलाओ। साहब, हमका बस इत्ते चाही कि जउन गलती भई, वा अउर कउनो के बच्चा के साथ न होय। हमार बच्चा त चला गवा, अब हमका न्याय चाही। यह बात सुनकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। उसने पूरे मामले की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। इस पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा दिया है।
वहीं दूसरी ओर जिला चिकित्सालय में 55 दिन के मासूम का शव कपड़े में लपेटे परिजन जब बिलख रहे थे, उसी वक्त नवागंतुक जिलाधिकारी अशोक कुमार औचक निरीक्षण पर पहुंच गए। सीएमओ से लेकर सीएमएस एवं अन्य स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार निरीक्षण में जिलाधिकारी के आगे पीछे घूमते रहे, लेकिन किसी के पास रोती बिलखती महिलाओं से बात करने का समय नहीं था।
चार घंटे शव गोद में रख, बिलखते रहे परिजन
हमीरपुर। 55 दिन के मासूम की मौत के बाद चार घंटे तक परिजन शव को गोद में लिए जिला अस्पताल में बैठे रहे। अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो पुलिस को कोई सूचना दी गई और न ही मासूम के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद पिता संदीप ने बिवांर थाने में शिकायती पत्र दिया। इसमें टीकाकरण में लापरवाही को मौत का प्रमुख कारण बताया। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस ने यह कहकर लौटा दिया कि यह मामला जिला अस्पताल का है। सीएमएस को इसकी सूचना देनी चाहिए। मृतक के पिता का कहना है कि जिलाधिकारी ने जांच का भरोसा दिया था, लेकिन यहां तो कोई सुनवाई ही नहीं हो रही तो जांच कैसी होगी इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
पोस्टमार्टम के लिए नहीं दिया कोई पत्र
सीएमएस डॉ. आरएस प्रजापति का कहना है कि मृतक के परिजनों की ओर से शव के पोस्टमार्टम के लिए कोई लिखित में पत्र नहीं दिया गया। एम्बुलेंस की मांग की गई थी वह उपलब्ध कराई गई। रही बात वैक्सीनेशन की तो वैक्सीन लगने के बाद बुखार आता है, इसमें किसी की मौत नहीं होती।
चेयरमैन बोले नहीं रही संवेदना
घटना की जानकारी के बात इमरजेंसी पहुंचे नगर पालिका हमीरपुर के चेयरमैन कुलदीप निषाद ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टर से बात की और कहा कि क्या संवेदनाएं बिल्कुल मर गई है। रेफर लेटर पर ओपीडी का पर्चा किस कानून की किताब में लिखा है। इस संदर्भ में उन्होंने सीएमओ से भी वार्ता की। उनका कहना है कि जांच नहीं हुई तो यह मामला राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष के समक्ष रखा जाएगा।