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भाड़ भूनकर मां ने बनाया कस्टम अधिकरी

Sat, 09 May 2015 11:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला महोबा।
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 लखनऊ में सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम विभाग में अधिकारी एवं यहां के विकासखंड कबरई के ग्राम खन्ना निवासी धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि सन् 1987 में पिता रामप्रकाश भुर्जी का स्वर्गवास हो गया था। उस समय चार साल उम्र थी। तब मां सावित्री ने मेहनत मजदूरी करके परिषदीय विद्यालय में शिक्षा दिलाई। इसके बाद नेशनल इंटर कॉलेज मौदहा में रहकर शिक्षा ग्रहण की। मौदहा पढ़ाई के लिए भेजने के बाद मां की मजदूरी से पढ़ाई प्रभावित होने लगी। मां ने मजदूरी के अलावा तड़के सुबह और रात में घर में भाड़ भूनकर अलग से पैसे का इंतजाम किया। मेरी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। आज मैं कस्टम आफीसर के पद पर मां के बलबूते ही पहुंचा हूं। मां ने मेरे इस मुकाम तक पहुंचने के बाद मां के सारे दुख खत्म हो गए हैं।
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सिपाही बनाने के लिए मां ने की जी तोड़ मेहनत
बेलाताल के मोहल्ला व्यासपुरा निवासी आशीष कुमार मिश्रा छत्तीसगढ़ में आईटीबीपी में सिपाही के पद पर तैनात हैं। वह बताते हैं कि उनके पिता स्व. रामगोपाल मिश्रा का 1993 में निधन के बाद मां संतोषी ने उनकी परवरिश की जिम्मेदारी संभाली। शुरुआत में विधवा पेंशन और अंत्योदय राशन कार्ड से मिलने वाले राशन से पालन पोषण और प्राथमिक शिक्षा दिलाई। 2003 में आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर नौकरी मिलने पर मां ने 500 रुपये प्रति माह के मानदेय पर भी मेरी पढ़ाई नहीं छूटने दी बल्कि अतिरिक्त काम करके पढ़ाई का खर्च वहन किया। आज उनके आशीर्वाद से मै आईटीबीपी में सिपाही के पद पर रहकर देश की सेवा कर रहा हूं और अपनी मां को सौभाग्यशाली मानता हूं कि उन्हाेंने देश की सेवा के लिए एक बेटा तैयार किया।

महसूस नहीं होने दी पिता की कमी
विकासखंड जैतपुर के ग्राम लमौरा निवासी माया देवी के पति जवाहर अहिरवार का आठ साल पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। माया देवी के तीन लड़कियां और दो लड़के हैं। पति की मौत से आहत माया देवी कुछ दिन तक तो बेसुध रहीं। लेकिन बच्चाें की जिंदगी बनाने के लिए उसने घर से निकलकर कड़ी मेहनत की और बच्चाें की परवरिश के साथ उन्हें बेहतर शिक्षा दी। इतना ही नहीं एक बेटी कौशल्या और बेटे गौरीशंकर की शादी भी कर दी है। पति के न होने के बाद भी उसने बच्चाें को पिता की कमी न महसूस हो, इसलिए खुद मेहनत मजदूरी करके बच्चाें को अच्छी शिक्षा दिलाई। आज भी बेटे और बेटियां कोई इंटरमीडिएट में तो कोई हाईस्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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पिता ने किया किनारा, मां ने दिया साथ
शहर के मोहल्ला भटीपुरा निवासी कपूरी देवी के पति बच्चाें की परवरिश न कर पाने के कारण बच्चाें और पत्नी से नाता तोड़कर मध्य प्रदेश चला गया। पति के न होने से कपूरी ने हिम्मत नहीं हारी और आल्हा चौक में चाय की दुकान खोलकर देर रात तक मेहनत की और सभी बच्चाें को बेहतर शिक्षा दिलाई। दो साल पहले पति मध्य प्रदेश से लौटकर घर आ गया और कुछ दिन बाद उसका स्वर्गवास हो गया। जिससे पत्नी फिर अकेली हो गई और आज भी पूरा परिवार चलाने के साथ-साथ सभी बच्चाें को अच्छी शिक्षा दिला रही है। एक बच्ची को इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद कानपुर में उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया है। जिससे बच्चे आज भी मां के साथ खुश हैं।
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