महोबा। भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोगों को अपने काम से फुरसत नहीं मिलती थी, वहीं वैश्विक महामारी ने मनुष्य की जीवन शैली को बदल कर रख दिया है। अब वर्क फ्राम होम के चलते घर में रहकर लोग काम कर रहे हैं। बच्चों को पहले स्कूल कालेज और ट्यूशन से फुरसत नहीं थी। वहीं कोरोना संक्रमण से चलते स्कूल बंद होने से बच्चे अब दादा -नानी के साथ कहानियां सुनकर आनंदित हो रहे हैं। बुजुर्गों ने बताया कि महामारी से बचाव को लेकर सप्ताह में सिर्फ दो दिन नहीं रोजाना लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं। ताकि हमसभी इस कोरोना महामारी से बचा जा सके।
केस-1 जैतपुर निवासी 98 वर्षीय राजाराम यादव बताते है कि अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसा वक्त देखने को नही मिला। 1941-42 में गांधी के साथ रहे पर पुलिस का इतना डर नही था। जितना अब लॉक डाउन में है। बाहर निकलने पर पुलिस कही अपमान न कर दे इस डर से घर से बाहर चाह कर भी नही निकलते हैं। घर के छोटे बच्चों को किस्सा कहानी सुनाकर उनके साथ समय गुजारते है। शेष समय में टीवी, रेडियो और अखबार का भी सहारा लेते हैं। बीमारी से बचाव करना है तो घर में रहना ही सबसे अधिक सुरक्षित है।
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केस- 2 जैतपुर निवासी 77 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक हमीद खान बताते है कि लॉकडाउन के समय घर में रह कर ही समय बिताते हैं। शुरूआत में नियमों के पालन करने में दिक्कत होती थी पर अब ादत हो गई है। महामारी से बचाव के लिए सिर्फ दो दिन नहीं हमारा तो हर दिन लॉकडाउन के नियमों के पालन के साथ गुजरता है। घर में रहकर छोटे बच्चों को कहानियां सुनाते वक्त कट जाता है। बाकी समय नमाज व इबादत करके गुजारते है, और दुआ करते है कि इस महामारी से जल्द से जल्द निजात मिल सके।