रोडवेज बसों में यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। वजह, रोडवेज बसों में आग लगने पर इससे निपटने के कोई इंतजाम नहीं है। स्थिति यह है कि रोडवेज की 90 फीसदी बसों में अग्निशमन यंत्र न होने से आग लगने पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
रोडवेज महकमा यात्रियों को भले ही बेहतर सुविधाएं देने का दावा कर रहा हो लेकिन हकीकत तो यह है कि मुसाफिरों की सुरक्षा से विभाग का कोई वास्ता नहीं है। रोडवेज महोबा डिपो में 85 रोडवेज और छह अनुबंधित सहित 91 बसों का बेड़ा है। जहां लंबे रूट पर नई बसें चल रही हैं वहीं लोकल रूटों पर बसों की डेंट- पेंट कराकर सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। रोडवेज यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करने वाले निगम की बसे कही रास्तें में ही दम तोड़ देती है। जिससे मजबूर होकर यात्रियों को अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। खटारा बसों से उबर चुका महोबा डिपो यात्रियों की सुरक्षा के साथ लगातार खिलवाड़ कर रहा है। हालत यह है कि रोडवेज की 90 फीसदी बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं है। जिससे किसी भी समय आग की चिंगारी यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। एक माह पहले रोडवेज बस में हुए एक अग्निकांड की घटना के बाद भी महकमे ने सबक नहीं लिया। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
फर्स्ट एड बॉक्स नदारद
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। नियमानुसार रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स का होना आवश्यक है। जिससे कोई छोटी बड़ी दुर्घटना होने पर चुटहिल होने पर यात्रियों को तुरंत राहत मुहैया कराई जा सके। लेकिन रोडवेज की किसी भी बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। यात्रियों से किराए और सुविधाओं के नाम पर पूरा पैसा वसूल करने के बाद भी रोडवेज महकमा यात्रियों को सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रहा है।