डिप्टी कमिशभनर वाणिज्यकर आरपी त्रिपाठी ने कहा कि रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों के साथ कार्रवाई में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हर पंजीकृत व्यापारी को पहली तिमाही 30 जून की समाप्ति के बाद 10 जुलाई को अपने कारोबार का करापवंचन दाखिल करना होगा। वरना भारी जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
डिप्टी कमिश्नर जिले के वाणिज्यकर कार्यालय में आयोजित व्यापारियों की बैठक में डिप्टी कमिशभनर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यापारी तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर करापवंचन के लिए आंकड़े बनाकर बिक्री को देता है। जिसकी जांच उनकी स्पेशल सेल द्वारा की जाती है, यदि व्यापारी के आंकड़े करापवंचन से जुडे मिले तो कार्रवाई करने के साथ पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है। शासन ने अब सबकुछ आनलाइन कर दिया है ऐसी स्थिति में व्यापारी भ्रामक तथ्यों पर रिटर्न या वार्षिक रिटर्न नहीं दे सकता। असिस्टेंट कमिश्नर राजीव पांडेय ने कहा कि वित्तीय वर्ष का पहला त्रिमास 30 जून को समाप्त हो रहा है। जिसका त्रैमासिक रिटर्न हर हाल में व्यापारियों को 20 जुलाई से पहले जमा करना होगा। साथ ही कर की राशि 10 जुलाई तक जमा करानी होगी। त्रैमासिक वार्षिक रिटर्न में विलंब पर लगने वाले जुर्माने पर किसी भी प्रकार की छूट नहीं हैं। उन्होेंने शासन द्वारा हाल ही चालू कराई गई ई-संचरण योजना की जानकारी भी व्यापारियों को दी। उन्होंने कहा कि ई- संचरण से घर बैठै बिना वाणिज्यकर कार्यालय आए अपना काम करा सकेंगे। बैठक मेें अधिवक्ता बृजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यहां जिले में व्यापारी कंप्यूटर इंटरनेट का काम नहीं जानते और न ही इतने अधिक क्वालीफाई व्यापारी हैं जो पासवर्ड के सहारे व्यापारिक गतिविधियां संपन्न करा सके। ऐसी स्थिति में इस जिले के व्यापारियों को ई-संचरण स्वैच्छिक किया जाना चाहिए। इस दौरान प्रदीप चंद्र गुप्ता ने वैट अधिनियम के दौरान ई-फायलिंग में आने वाली समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। इस मौके पर बसंत लाल गुप्ता, चंदन सिंह, जितेंद्र, रामकृपाल कुटार, सीताराम, जगदीश कुमार, अरुण पुरवार, कालूराम, श्रीकांत, रमेश सहित तमाम व्यापारी अधिकारी मौजूद रहे।