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एनओसी न देने वाले 20 सेंटरों के पंजीकरण हो सकते हैं निरस्त

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महोबा। प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र व राज्य सरकार लगातार प्रयास कररही हैं। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रदूषण फैलाने पर सख्ती से रोक लगाने के आदेश दिए हैं। सीएमओ ने सभी 105 नर्सिंग होम, पैथालाजी व अल्ट्रा साउंड सेंटर को नोटिस दिया है। सीएमओ सभागार में बैठक में एसीएमओ सज्जन कुमार ने कहा कि जिन संचालकों ने एनओसी नहीं दी है। उनके पंजीकरण निरस्तीकरण के लिए राज्य स्तर पर संस्तुति की जाएगी।
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एसीएमओ ने एनजीटी, नई दिल्ली के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल उत्तर प्रदेश ठोस अपशिष्ट प्रबंधन समिति की बैठक में न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह ने जनपद में संचालित हर विधा के नर्सिंग होम, हॉस्पिटल, क्लीनिक, पैथालाजी, एक्सरे व अल्ट्रा साउंड सेंटर काएमपीसीसी (मेडिकल पाल्युशन कंट्रोल कम्युनिटी), झांसी से अनुबंध कराते हुए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बांदा से अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। अभी तक 85 सेंटरों ने एग्रीमेंटव एनओसी लेकर दिए है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को अंतिम मौका दिया गया था। इसके बाद भी 20 सेंटरों ने एनओसी नहीं दी। जिनमें कई नर्सिंग होम, पैथालाजी, एक्सरे व अल्ट्रा साउंड सेंटर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब उक्त 20 सेंटरों के पंजीकरण निरस्त करने तथा समुचित विधिक कार्यवाही के लिए राज्य स्तर पर संस्तुति की जाएगी। बैठक मे ंजिला क्वालिटी एश्योरेंस सलाहकार डॉ. दिवाकर प्रताप सिंह, डॉ. पीडी अवस्थी, डीएमओ डॉ. स्वतंत्र मिश्रा, डॉ. सुधीर खरे, मलेरिया निरीक्षक रामज्ञान यादव आदि उपस्थित रहे।
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