अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस
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मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधा मुहैया कराने के दावे हवा हवाई है। जिला अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस का मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल से रेफर करने पर उन्हें प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐेसे में एंबुलेंस संचालक तीमारदारों से मनमाना पैसा वसूल कर रहे है।
जिला अस्पताल में तीन एंबुलेंस है, लेकिन एक महीने में यह एंबुलेंस बहुत ज्यादा आधा दर्जन मरीजों को ही झांसी व छतरपुर ले जाती है। जबकि जिला अस्पताल से पिछले महीने तीन दर्जन से अधिक मरीजों को रेफर किया गया है। कर्मचारियों से सांठगांठ होने के चलते मरीज रेफर होते ही इसकी सूचना प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों को मिल जाती है। जरूरत देखकर एंबुलेंस संचालक तीमारदारों से मनमाना पैसा वसूल करते हैं।
हालत यह है कि मौजूदा समय में जिला अस्पताल परिसर में आधा दर्जन प्राइवेट एंबुलेंस का कब्जा है, जबकि सरकारी एंबुलेंस नजर नहीं आती है। जानकारी करने पर कर्मचारी सरकारी एंबुलेंस दूसरे मरीज को लेकर बाहर जाने की बात कहते है। अस्पताल परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस खड़े होेने पर रोक है, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलीभगत होने के कारण एंबुलेंस संचालक मरीजों को लूट रहे है।