महोबा/कुलपहाड़/श्रीनगर। प्रतिदिन हो रही बिजली कटौती ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे के रोस्टर के मुकाबले बमुश्किल आठ घंटे ही आपूर्ति की जा रही है। रात के समय होने वाली कटौती ने परेशानी और बढ़ा दी है। बिजली पर निर्भर लघु व कुटीर उद्योगों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। बिजली के अभाव में लोगों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। बिजली संकट से ग्रामीण परेशान हैं।
दरअसल पिछले दिनों हुई भारी बारिश और खदानों में जलभराव से कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर प्रदेश की तापीय बिजली उत्पादन इकाइयों में पड़ रहा है। इससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कुलपहाड़ संवाद के अनुसार पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पटरी से उतरी है। पहले जहां ग्रामीण क्षेत्र में 16 से 18 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही थी। वहीं अब आठ से दस घंटे ही आपूर्ति मिल रही है। बिजली कटौती के संबंध में उपभोक्ताओं को कोई सूचना भी नहीं दी जाती। कस्बे के हरिओम, रमाशंकर, महाराज सिंह, जयपाल, नाथूराम आदि उपभोक्ताओं ने बिजली आपूर्ति की पुरानी स्थिति बहाल किए जाने और बिजली कटौती का सही कारण स्पष्ट किए जाने की मांग की है।
श्रीनगर संवाद के अनुसार ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 10 से 12 घंटे व शहरी क्षेत्र में 12 से 15 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। कटौती से उपभोक्ता परेशान हैं। उधर, बिजली निगम के अवर अभियंता देवकीनंदन आर्य का कहना है कि प्रदेश में कोयले की कमी होने से 33 बिजली इकाइयां बंद हो गई हैं। इससे उत्पादन घट गया है। इससे फीडर के अनुसार कटौती कर बिजली आपूर्ति उपभोक्ताओं को दी जा रही है।