करोड़ों रुपये से कराई जा रही तालाब खुदाई में जमकर खेल हो रहा है। खुदाई से लेकर तालाब की मिट्टी बाहर फेंकने तक पैसा लिया जा रहा है, इसके बाद भी तालाब की मिट्टी तालाब में ही डाली जा रही है। जिससे जल भंडारण क्षमता थोड़ी बहुत ही बढ़ सकेगी। कार्यदायी संस्था की अनदेखी के चलते लोगों में नाराजगी है।
बुंदेलखंड के 100 तालाबों में से महोबा जनपद में 52 तालाबों की खुदाई चल रही है। बारिश से पहले खुदाई का काम निपटाने के लिए दिन रात तालाबाें में मशीनें चल रही हैं। चंदेल कालीन मदन सागर सरोवर में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर मिट्टी की खुदाई की जा रही है, लेकिन मिट्टी बाहर फेंकने के बजाए तालाब में ही ढेर लगाया जा रहा है। जिससे तालाब खुदाई का कोई लाभ नहीं होगा। 10 दिन से मदन सागर सरोवर में की जा रही खुदाई की ज्यादातर मिट्टी तालाब के कई हिस्साें में डाली गई है।
इससे नागरिकों में नाराजगी है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता विनय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि सूचना मिलने पर मदन सागर सरोवर का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण दौरान मदन सागर में मिट्टी पड़ी पाई गई है। मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए है। यदि मिट्टी नहीं हटाई गई तो खुदाई करने वाले मशीन संचालकों का पैसा रोक दिया जाएगा।
चंदेल शासक की ओर से नहाने के लिए बनाए गए घाटों पर तालाब की मिट्टी डाल देने से घाट बर्बाद हो गए है। अब तालाबों में लबालब पानी भरने के बाद भी लोग घाटों पर नहा नहीं कर सकेंगे। साथ ही मिट्टी पड़ी होने से वहां कीचड़ होगा। इतना ही नहीं घाटों की मिट्टी दोबारा तालाबों में समा जाएगी।