परमार आवास में आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। कवि संतोष द्विवेदी द्वारा पढ़ी गई रचना प्रलयकारी भूकंप ने कैसा कहर ढहाया है प्रकृति से छेडछाड़ कर बेसुर बिगुल बजाया है। खासी सराही गई।
कवि सम्मेलन का शुभारम्भ संतोष द्विवेदी द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। उन्होंने नेपाल में आए भूकंप से हुई त्रासदी पर रचना पढ़ी। कवि पं. जगप्रसाद तिवारी ने ज्योति की इस प्रकार व्याख्या की ज्ञान की ज्योति जलाई है तुमने जीवन में राम की महिमा गाई है । ़अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य शिव कुमार गोस्वामी ने की। संचालन साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष पं. जगप्रसाद तिवारी ने किया। गोष्ठी का शुभारम्भ संतोष द्विवेदी द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। उन्होंने नेपाल में आए भूकंप से हुई त्रासदी पर रचना पढ़ी। वरिष्ठ साहित्यकार उमाशंकर नगायच ने रचना पढ़ते हुए सभी का मार्ग दर्शन वर्तमान परिदृश्य में किया। विष्णुरात चतुर्वेदी विदेह ने राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार कहा हर प्रांत निवासी यही कहे कि प्रांत अकेला उसका है। तो आज पूंछता हूं सबसे बोलो फिर भारत किसका है। शिवकुमार गोस्वामी ने भी वर्तमान सामाजिक स्थिति पर रचना सुनाकर सभी को जागरूक किया। डा0 एल. सी. अनुरागी ने दोहा पढ़ते हुए कहा दो अक्षर पर रहते चारों धाम, निसदिन जपो प्यारा राम का नाम। आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के रूप में कई दशक तक लोगों को स्वास्थ्य लाभ देकर सेवा निवृत्त हो चुके डा रामकुमार सिंह परमार को इस मौके पर भावभीनी विदाई दी गई। जिसमें क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी हमीरपुर ,डा ज्ञानेश अवस्थी,अनुराग पुरवार,राघवेंद्र सिंह,अशोक सिंह परिहार , बंशीधर सेंगर, डा0 डीके सिंह, हिमांशु, अशोक दाऊ, कैलाश नाथ गोस्वामी, रमेश जैदका सहित तमाम लोग मौजूद रहे।